भूमि अधिग्रहण की बाधाएं दूर करने पर जोर
सड़क परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान सामने आया कि रांची जिले में कई योजनाओं की प्रगति भूमि अधिग्रहण, उपयोगिताओं की शिफ्टिंग और अन्य प्रक्रियाओं में देरी के कारण प्रभावित हो रही है। प्रधान सचिव ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए जिला प्रशासन और जिला भू-अर्जन कार्यालय के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन हिस्सों में जमीन उपलब्ध है, वहां सड़क निर्माण को अलग-अलग खंडों में बांटकर चरणबद्ध तरीके से काम कराया जाए, ताकि पूरी परियोजना के लिए जमीन मिलने का इंतजार किए बिना निर्माण आगे बढ़ सके।
रांची की कई प्रमुख सड़क योजनाओं की समीक्षा
समीक्षा बैठक में रांची की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। इनमें खेलगांव से नामकुम आरओबी तक फोरलेन और टूलेन सड़क, दुर्गा सोरेन चौक नामकुम से रामपुर रिंग रोड तक फोरलेन सड़क, कांके हॉलिडे होम से भिट्ठा-एदलहातु होते हुए बोरियो-चिरौंदी तक सड़क और रांची-पुरुलिया रोड पर नामकुम आरओबी से अनगड़ा तक 17.70 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है।
इसके अलावा कोदोजोरा मोड़ से घाघरा-पांडेपारा होते हुए लोहरदगा मुख्य सड़क, बरियातू-लेम-बड़गाईं-बोड़ियो, पंडरा से कांके, डीएवी पुंदाग से डीएवी हेहल और बिरसा मुंडा एयरपोर्ट (हुंडरू)-हेथू सड़क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।
चंदाघासी-कोचांग रिंग रोड और बहुबाजार से पटेल चौक को जोड़ने वाले फ्लाईओवर की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
सभी जिलों के उपायुक्तों को लिखा पत्र
प्रधान सचिव सुनील कुमार ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर लंबित सड़क परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने का अनुरोध किया है। उन्होंने पथ निर्माण विभाग और संबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा भूमि अधिग्रहण और वन भूमि से जुड़ी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा कराने पर जोर दिया है।
विभाग के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में देरी से निर्माण कार्य प्रभावित होने के साथ परियोजनाओं की लागत भी बढ़ सकती है। इसके अलावा त्योहारों को ध्यान में रखते हुए विभागीय सड़कों और संपर्क मार्गों को सुरक्षित एवं यातायात योग्य बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
अब विभाग का जोर लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर सड़क निर्माण कार्यों में तेजी लाने पर है, ताकि लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिल सके।


