कॉजपा के सौरभ दास की पृष्ठभूमि की जांच के अनुरोध को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर

मद्रास उच्च न्यायालय ने कॉजपा के सह-संयोजक सौरभ दास की पृष्ठभूमि की जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है।

Razi Ahmad
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चेन्नई: एक कारोबारी ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय का रुख कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के राष्ट्रीय सह-संयोजक योगेश शर्मा उर्फ सौरभ दास और उनके माता-पिता की पृष्ठभूमि एवं अन्य विवरणों की तत्काल विस्तृत, गहन और निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

गणेश कुमार ने अपनी याचिका में कहा कि दास के पूर्वज नेपाल से कथित तौर पर जुड़े हैं और इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि यह बात सही पाई जाती है तो ‘‘वह हमारी सरकार और न्यायपालिका पर उपदेश नहीं दे सकते।’’

उन्होंने दास पर न्यायपालिका का ‘‘अपमान’’ करने का आरोप भी लगाया।

याचिकाकर्ता ने दोषी पाए जाने पर दास का पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने का अनुरोध किया।

मुख्य न्यायाधीश एस ए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने कांचीपुरम जिले के गणेश कुमार की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी और 10 अन्य को नोटिस जारी किया। पीठ ने छह सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया।

कुमार ने अपनी याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार मंत्रालय को ‘सौरभ दास’ नाम से संचालित ट्विटर और इंस्टाग्राम हैंडल को बंद करने तथा उन्हें न्यायपालिका और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ आगे कोई अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया।

उन्होंने अदालत से यह अनुरोध भी किया कि मौजूदा मामले के निस्तारण तक दास को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में किसी भी माध्यम से देश की न्यायपालिका के खिलाफ मानहानिकारक, धमकाने वाली, अपमानजनक और तिरस्कारपूर्ण टिप्पणियां करने से रोका जाए।

कुमार ने दावा किया कि दास लगातार न्यायपालिका को अपशब्द कह रहे हैं और यह अपने आप में संविधान का दुरुपयोग है।

उन्होंने कहा कि यदि दास के नेपाली मूल का होने संबंधी जानकारी सही है, तो योगेश शर्मा नामक इस व्यक्ति ने जानबूझकर इन सभी तथ्यों को छिपाया और धोखाधड़ी करके भारत में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पासपोर्ट हासिल किया।

कुमार ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका को अपशब्द कहने का कोई अधिकार नहीं है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि राष्ट्रहित में इस मामले की गहन जांच की जानी चाहिए कि उन्होंने आधार कार्ड और पासपोर्ट कैसे हासिल किए, उन्हें धन कहां से और किन लोगों से मिल रहा था तथा वह न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां क्यों कर रहे थे।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।