झारखंड: झारखंड में पिछड़ा वर्ग (अनुसूची-2) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (अनुसूची-1) के अभ्यर्थियों को नॉन क्रीमीलेयर प्रमाण-पत्र की वैधता को लेकर राहत दी गयी है. अब पूर्व में जारी नॉन क्रीमीलेयर प्रमाण-पत्र के साथ क्रीमीलेयर में नहीं होने संबंधी अद्यतन स्वघोषणा पत्र यानी फॉर्म संख्या-15 जमा करने पर पुराने प्रमाण-पत्र को भी मान्य किया जा सकेगा.

इस व्यवस्था से अभ्यर्थियों को हर साल नया नॉन क्रीमीलेयर प्रमाण-पत्र बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसका लाभ प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नियुक्तियों और तकनीकी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को मिलेगा.

विभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नॉन क्रीमीलेयर प्रमाण-पत्र बार-बार जारी नहीं किये जायेंगे. सामान्य तौर पर प्रमाण-पत्र की वैधता जारी होने की तारीख से एक वर्ष होती है.
हालांकि, पूर्व में जारी प्रमाण-पत्र के साथ आवेदक या आवेदिका द्वारा फॉर्म संख्या-15 में क्रीमीलेयर में नहीं होने संबंधी अद्यतन स्वघोषणा पत्र जमा करने पर प्रमाण-पत्र को स्वघोषणा पत्र जमा करने वाले वित्तीय वर्ष के लिए भी मान्य किया जा सकेगा. इसका मतलब है कि पिछले वित्तीय वर्ष या उससे पहले जारी नॉन क्रीमीलेयर प्रमाण-पत्र को भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने पर इस्तेमाल किया जा सकेगा.


