कोलकाता: प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय ने स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाले पोस्टर पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखने और अन्य संगठनों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में दो छात्राओं को निष्कासित कर दिया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि यह फैसला एक जांच समिति द्वारा सीसीटीवी फुटेज की जांच करने और विभिन्न पक्षों की बात सुनने के बाद लिया गया।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दोनों छात्राओं को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है और वे संस्थान में भविष्य के किसी भी डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भी पात्र नहीं होंगी।
विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि उसने हमेशा वैज्ञानिक और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर गरिमापूर्ण शैक्षणिक चर्चा एवं बहस को बढ़ावा दिया है।

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि वह विचारकों, विचारों या संगठनों के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने आरोप लगाया कि 13 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर में उनके द्वारा लगाए गए स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाले पोस्टर को विरूपित कर दिया गया और उस पर अपमानजनक बातें लिख दी गईं।
इसके बाद एबीवीपी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संगठन ने विश्वविद्यालय के गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया। इस बीच, वामपंथी विचारधारा वाले ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) ने इस घटना में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
संगठन ने पोस्टर को विरूपित किए जाने की निंदा की और कहा कि किसी भी वामपंथी संगठन ने स्वामी विवेकानंद का अपमान करने वाला ऐसा कोई काम न तो शुरू किया और न ही उसमें हिस्सा लिया। एसएफआई ने यह भी कहा कि उनका इरादा हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। इसने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
विश्वविद्यालय ने निष्कासित की गईं दोनों छात्राओं की पहचान उजागर नहीं की है।


