कोविड महामारी में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी 10 लाख की सहायता: डब्ल्यूसीडी

News Aroma Media
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नई दिल्ली: कोविड-19 में अपने परिवार को खोने वाले अनाथ बच्चों के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यूसीडी) ने पोर्टल बनाया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण माता-पिता या कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता दोनों को खो दिया है।

यह योजना शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सहायता प्रदान करती है और प्रत्येक बच्चे के 18 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर उसके लिए 10 लाख रुपये का कोष बनाएगी।

हालांकि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड महामारी के कारण कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चों का समर्थन करने के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना की घोषणा की थी।

फिलहाल पोर्टल के सम्बंध में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने जानकारी दी है कि अब तक 5491 आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 3049 आवेदनों को उचित प्रक्रिया के बाद जिलाधिकारियों द्वारा अनुमोदित किया गया है और 483 आवेदन अनुमोदन के लिए लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि यह योजना शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सहायता प्रदान करती है और प्रत्येक बच्चे के 18 वर्ष की आयु के होने पर उसके लिए 10 लाख रुपये का कोष तैयार करेगी।

इस कोष का उपयोग 18 वर्ष की आयु से मासिक वित्तीय सहायता या वजीफा देने के लिए किया जाएगा।

इससे अगले 5 वर्षों के लिए उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं की देखभाल के लिए और 23 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर, वह या उसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग के लिए एकमुश्त राशि के रूप में कॉर्पस राशि मिलेगी। यह योजना एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध है।

इसके साथ ही मंत्रालय बाल संरक्षण सेवा (सीपीएस) योजना नामक एक केंद्र प्रायोजित योजना लागू कर रहा है जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को जरूरतमंद और कठिन परिस्थितियों में बच्चों के लिए सेवाएं प्रदान करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है।

सीपीएस योजना के तहत स्थापित बाल देखभाल संस्थान (सीसीआई) अन्य बातों के साथ-साथ आयु-उपयुक्त शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण तक पहुंच, मनोरंजन, स्वास्थ्य देखभाल, परामर्श आदि का समर्थन करते हैं और समान रूप से ग्रामीण और शहरी बच्चों को कवर करते हैं।

योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की गैर-संस्थागत देखभाल के लिए प्रति माह 2000 रुपये उपलब्ध है और प्रति बच्चा प्रति माह 2160 रुपये के रखरखाव अनुदान का प्रावधान है।

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