
दयानंद राय
मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान आज गौरी स्प्रैट के साथ तीसरी शादी के बंधन में बंध गए हैं। आमिर खान तीसरी शादी करने वाले पहले इंसान और अभिनेता नहीं हैं। गायक किशोर कुमार चार शादियां कर चुके हैं और उनके मुताबिक उन्हें वैवाहिक जीवन में संतुष्टि लीना चंद्रावरकर से ही मिली। आमिर खान अपने वैवाहिक जीवन से भले ही असंतुष्ट हों पर उनका विवाह नाम की संस्था पर पूरा भरोसा है। वे चाहते तो गौरी स्प्रेट के साथ लिव इन रिलेशनशिप में भी रह सकते थे, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
आमिर खान अपनी पहली दो पत्नियों को तलाक दे चुके हैं। उनकी दोनों तलाकशुदा पत्नियों को भी आमिर खान की तीसरी शादी से कोई दिक्कत नहीं है। पर आमिर खान तीसरी शादी करके समाज को क्या संदेश दे रहे हैं। भारतीय समाज आमतौर पर एक शादी वाला समाज है। यहां एक बार शादी होती है और सात जन्मों का बंधन बंध जाता है। पति और पत्नी में चाहे जितनी लड़ाइयां हों, झगड़े हों, मनमुटाव हो पर एक बार शादी हो गयी तो जीवनभर उसे निभाना है। जीवन में आदर्श जैसी कोई चीज नहीं हुआ करती है, हर चीज का अपवाद होता है, तो यह मान लेना चाहिए कि एक शादी और उसके बाद सात जन्मों के बंधन की अवधारणा आमिर खान को सूट नहीं करती।
सवाल ये हो सकता है कि हम आमिर खान की शादी की चर्चा क्यों कर रहे हैं वे तीसरी करें या पांचवीं हमें क्या दिक्कत है। लेकिन दिक्कत है। दिक्कत ये है कि आमिर खान भारतीय सिनेमा के बेहतरीन अदाकारों में से एक रहे हैं, युवा उन्हें आइकॉन मानता रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
लेकिन आदर्शों का आचार लगाना आमिर खान को पसंद नहीं है। उन्हें जो पसंद हैं वे कर रहे हैं। उनकी शादी पर विमर्श करना भी बहुत जरूरी नहीं है पर सवाल तो उठेंगे ही। समाज जब एक स्थापित मानदंड और परंपरा को टूटता देखता है तो वो सवाल पूछने और उठाने लगता है। फिर उन सवालों के घेरे में आमिर खान हों या कोई और। आमिर खान के पक्ष में एक तर्क काम कर सकता है कि इस्लाम में कई शादियों की इजाजत है। एक और तर्क उनके पक्ष में हो सकता है कि उनकी पूर्व की दो पत्नियों को उनकी तीसरी शादी से कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन सामाजिक मान-मर्यादा भी तो कोई चीज है। यूरोप में बहुविवाह पर शायद कोई ऐतराज न करे लेकिन आमिर खान को ये नहीं भूलना चाहिए कि वे भारत में हैं और भारत में अमूमन तीन विवाह करने का चलन नहीं है।
मिस्टर परफेक्शनिट जिंदगी फिल्मों की रील नहीं है जहां अपने अनुसार फिल्म का अंत किया जा सकता है।

