
जमशेदपुर : पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा सोमवार को तुरामडीह, जमशेदपुर में नांदुप गांव के विस्थापित और प्रभावित ग्रामीणों के साथ उनकी न्यायोचित मांगों के समर्थन में यूसील प्रबंधन के खिलाफ आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि तुरामडीह माइंस की स्थापना के लिए नांदुप मौजा के अनेक परिवारों ने अपनी जमीन, घर, खेती-बाड़ी, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का त्याग किया। विकास और राष्ट्रनिर्माण की इस यात्रा में सबसे बड़ी कीमत इन ग्रामीणों ने चुकाई है। इस क्षेत्र से निकलने वाला यूरेनियम देश की सामरिक एवं ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों में से एक है, इसलिए स्थानीय लोगों का यह योगदान भी राष्ट्रहित में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी विस्थापित परिवार पुनर्वास, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं जैसी बुनियादी मांगों के लिए संघर्ष करने को विवश हैं।
विगत दिनों विस्थापित ग्रामीणों एवं यूसीआईएल प्रबंधन के बीच हुए समझौते पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। साथ ही, तुरामडीह विस्थापित समिति द्वारा सौंपे गए मांग पत्र पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। जिन लोगों ने अपनी जमीन और आजीविका का बलिदान देकर देश के विकास में योगदान दिया, उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान होना चाहिए। धरना स्थल पर यूसीआईएल प्रबंधन के प्रतिनिधियों से वार्ता कर विस्थापितों एवं प्रभावितों की समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक, संवेदनशील एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया। स्पष्ट कहा कि विकास तभी सार्थक और न्यायपूर्ण माना जाएगा, जब उसमें स्थानीय लोगों के सम्मान, अधिकार, पुनर्वास और भागीदारी को समान महत्व दिया जाए। विस्थापित परिवारों के हक, सम्मान और न्याय की इस लड़ाई में मैं सदैव उनके साथ खड़ा हूँ। भारतीय जनता पार्टी भी विस्थापितों एवं प्रभावितों की न्यायोचित मांगों के समर्थन में पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है। उनकी आवाज़ को हर उचित मंच पर उठाया जाएगा तथा उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया जाएगा।

