
रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) द्वारा विकसित ‘बिरसा भामा मस्टर्ड-1’ वैराइटी की मांग अब झारखंड से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। इसकी बेहतर उत्पादकता, अधिक तेल की मात्रा और कम अवधि में तैयार होने की विशेषताओं के कारण ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत कई पड़ोसी राज्यों के किसान इस बीज को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार के अनुसार, इस किस्म का विकास वर्ष 2021 में किया गया था और जनवरी 2022 में इसे अधिसूचित किया गया। इसके बाद इसे बाजार में उतारा गया। वर्तमान में राष्ट्रीय बीज निगम के माध्यम से प्रमाणित बीज तैयार कर किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है।
बिरसा भामा मस्टर्ड-1 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अधिक उपज और तेल की मात्रा है। एक किलो सरसों से लगभग 400 ग्राम तक तेल निकलता है, जबकि इसमें 39 से 41 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती है। यह फसल बुवाई के 112 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को समय पर अगली फसल लेने का अवसर मिलता है।
विश्वविद्यालय अब सरसों की नई और अधिक उन्नत किस्म विकसित करने पर भी काम कर रहा है, ताकि धान कटाई के बाद कम समय में किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। झारखंड में इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 15-16 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है, जबकि इसकी संभावित क्षमता 28-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण बीज और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन में और वृद्धि संभव है।

