पड़ोसी राज्यों में बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की सरसों के बीज की डिमांड, जानें क्या है इसकी खासियत

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की विकसित बिरसा भामा मस्टर्ड-1 किस्म की मांग बढ़ी, बेहतर उत्पादन और अधिक तेल क्षमता के कारण ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत पड़ोसी राज्यों के किसान आकर्षित।

2 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) द्वारा विकसित ‘बिरसा भामा मस्टर्ड-1’ वैराइटी की मांग अब झारखंड से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। इसकी बेहतर उत्पादकता, अधिक तेल की मात्रा और कम अवधि में तैयार होने की विशेषताओं के कारण ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत कई पड़ोसी राज्यों के किसान इस बीज को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार के अनुसार, इस किस्म का विकास वर्ष 2021 में किया गया था और जनवरी 2022 में इसे अधिसूचित किया गया। इसके बाद इसे बाजार में उतारा गया। वर्तमान में राष्ट्रीय बीज निगम के माध्यम से प्रमाणित बीज तैयार कर किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है।

बिरसा भामा मस्टर्ड-1 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अधिक उपज और तेल की मात्रा है। एक किलो सरसों से लगभग 400 ग्राम तक तेल निकलता है, जबकि इसमें 39 से 41 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती है। यह फसल बुवाई के 112 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को समय पर अगली फसल लेने का अवसर मिलता है।

विश्वविद्यालय अब सरसों की नई और अधिक उन्नत किस्म विकसित करने पर भी काम कर रहा है, ताकि धान कटाई के बाद कम समय में किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। झारखंड में इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 15-16 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है, जबकि इसकी संभावित क्षमता 28-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण बीज और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन में और वृद्धि संभव है।

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।