मरीज की आंख और ब्रेन में पूरी तरह फैल चुका था ब्लैक फंगस संक्रमण, रिम्स के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर बचायी जान

इस महिला में ब्लैक फंगस का संक्रमण उसकी आंख और ब्रेन में पूरी तरह फैल चुका था

रांची: ब्लैक फंगस से ग्रसित धनबाद के जोरापोखर थाना क्षेत्र निवासी एक महिला को अपनी आंख गंवानी पड़ गयी। रिम्स में ऑपरेशन कर उसकी आंख निकाल दी गयी।

इसके लिए डॉक्टरों को मरीज के परिजनों को काफी मनाना पड़ा। मरीज के परिजन इस ऑपरेशन के लिए तैयार ही नहीं हो रहे थे। दरअसल, इस महिला में ब्लैक फंगस का संक्रमण उसकी आंख और ब्रेन में पूरी तरह फैल चुका था।

अगस्त में ही डॉक्टरों ने मरीज की आंख का ऑपरेशन करने की सलाह दी थी। लेकिन, मरीज के परिजनों ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया था। इधर, मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी।

डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन करना जरूरी हो गया था। डॉक्टरों ने मरीज के परिजनों को छह बार सलाह दी कि ऑपरेशन करा लें, लेकिन वे राजी नहीं हुए।

आखिरकार मरीज की जान बचाने की खातिर रिम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मरीज के परिजनों से फिर बात की। उन्हें समझाया। करीब दो से तीन घंटे तक डॉक्टरों ने परिजनों को समझाया और तब जाकर परिजन इस ऑपरेशन के लिए तैयार हुए।

रिम्स के ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ जाहिद मुस्तफा खान ने बताया कि ऑपरेशन करने में दो सप्ताह और देर हो जाती, तो मरीज की जान जा सकती थी।

अगर अगस्त में ही यह ऑपरेशन हो गया होता, तो आज मरीज की आंख निकालने की भी जरूरत नहीं पड़ती। डॉ खान ने बताया कि ऐसी जटिल सर्जरी के लिए अलग-अलग मेडिकल विभागों के सामंजस्य की जरूरत होती है।

रिम्स में ऐसे सामंजस्य की बेहतर व्यवस्था है। उक्त महिला मरीज के ऑपरेशन में रिम्स के रेडियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, मेक्सिलोफेसियल सर्जन, डेंटल, ईएनटी, मेडिसीन और क्रिटिकल केयर के डॉक्टर ने सराहनीय योगदान दिया।

डॉ खान ने कहा कि मरीजों को रिम्स के डॉक्टरों पर भरोसा करने की जरूरत है। बता दें कि रिम्स में हुए इस ऑपरेशन के लिए मरीज और उसके परिजनों को एक पैसे का भी भुगतान नहीं करना पड़ा।

यही ऑपरेशन अगर किसी निजी अस्पताल में हुआ होता, तो मरीज के परिजनों को अनुमानतः दो लाख रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ जाते।

हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को किसी भी दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।
Back to top button