

बोकारो : कभी बोकारो की पहचान और बच्चों की पहली पसंद रहा नेहरू पार्क आज अपनी पुरानी रौनक तलाश रहा है। एक समय यहां शेर-बाघ की दहाड़ गूंजती थी, टॉय ट्रेन की सीटी बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरती थी और मछली घर लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। लेकिन आज शेर, बाघ, मगरमच्छ और लकड़बग्घा नहीं हैं। टॉय ट्रेन वर्षों से बंद है और मछली घर भी सूना पड़ा है। पार्क के अंदर कैंटीन और पर्याप्त शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।






हालांकि, नेहरू पार्क की हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। कई हिस्सों में साफ-सफाई भी अच्छी है। पार्क में अभी भी तेंदुआ, भालू, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल, अजगर, मोर, बंदर और हिरण की कई प्रजातियां मौजूद हैं। बच्चों के लिए झूले भी हैं, लेकिन पहले जैसा रोमांच अब महसूस नहीं होता। शहरवासियों की मांग है कि टॉय ट्रेन फिर से चलाई जाए, मछली घर खोला जाए, पार्क में कैंटीन और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था की जाए तथा नए आकर्षण विकसित किए जाएं, ताकि नेहरू पार्क फिर से बोकारो की शान बन सके।

