झारखंड विधानसभा का बजट सत्र: वित्तीय वर्ष 2024-25 पर प्रमुख चर्चा

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Budget Session : झारखंड विधानसभा का बजट सत्र आज अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है, जिसमें आज की कार्यवाही प्रश्न काल से शुरू होगी। इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2024-25 के तृतीय अनुपूरक व्यय पर गहन चर्चा होने की संभावना है। राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर इस व्यय विवरणी को विधानसभा में पेश करेंगे। यह बजट सत्र राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर व्यापक चर्चा का अवसर प्रदान करता है, क्योंकि यह आगामी वित्तीय वर्ष के लिए संसाधनों के सही प्रबंधन और विकास योजनाओं पर विचार करने का महत्वपूर्ण मंच होगा।

28 फरवरी को तृतीय अनुपूरक व्यय पर वाद-विवाद

बजट सत्र के दौरान 28 फरवरी को तृतीय अनुपूरक व्यय पर वाद-विवाद होगा। इस दौरान सदन में व्यय से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद, सदन में मतदान किया जाएगा और इसके पश्चात विनियोग विधेयक को प्रस्तुत किया जाएगा। ध्यान रहे कि 2 मार्च तक इस सत्र की कार्यवाही स्थगित रहेगी, क्योंकि शनिवार और रविवार की छुट्टियां पड़ने वाली हैं।

3 मार्च को प्रस्तुत होगा राज्य का बजट

इस सत्र का प्रमुख आकर्षण 3 मार्च को होने वाला राज्य का बजट है, जिसे वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर सदन में पेश करेंगे। यह बजट राज्य के आगामी वित्तीय वर्ष के लिए दिशा और प्राथमिकताओं का निर्धारण करेगा। राज्य के विकास के लिए इस बजट की अहमियत अत्यधिक है, क्योंकि यह विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए फंडिंग और संसाधन आवंटित करेगा।

विपक्ष ने उठाए महत्वपूर्ण मुद्दे

बजट सत्र के पहले दो दिनों में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हुई थी। इसके बाद प्रश्न काल और शून्यकाल का आयोजन हुआ, जिसमें विपक्ष ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। विपक्ष ने पेपर लीक, बालू घाट नीलामी, और मंईयां सम्मान योजना जैसे गंभीर मुद्दों को सदन में उठाया। भाजपा ने पेपर लीक मामले पर विरोध प्रदर्शन भी किया और इसे लेकर सदन के बाहर भी आंदोलन किया। इन मुद्दों पर आगामी दिनों में विस्तृत चर्चा की संभावना है, जो राज्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक नीतियों को प्रभावित कर सकती है।

अगले दिनों में बजट पर और अधिक चर्चा

आने वाले दिनों में बजट सत्र के दौरान वित्तीय प्रबंधन और राज्य के विकास के लिए उठाए गए मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। बजट सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, जो राज्य की आगामी नीतियों और योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।

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