चाईबासा: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक के निर्देशानुसार चाईबासा स्थित सप्रेषण गृह में किशोरों के लिए एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सदर अस्पताल चाईबासा की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भाग्यश्री कर और कोल्हान विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. धर्मेंद्र रजक मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने किशोरों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. भाग्यश्री कर ने तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपाय साझा करते हुए बताया कि जीवन में कठिन परिस्थितियाँ आने पर भी मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने किशोरों को तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लेने के अभ्यास, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधियों, सकारात्मक आत्म-संवाद और अपनी परेशानियों को किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करने की सलाह दी। उन्होंने समझाया कि गुस्सा या बेचैनी महसूस होने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पल शांत रहने का प्रयास करना चाहिए।
डॉ. धर्मेंद्र रजक ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह हम शारीरिक सेहत के लिए खानपान और व्यायाम का ध्यान रखते हैं, उसी तरह मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी समान रूप से गंभीर होना आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य हमारे विचारों, भावनाओं, व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता को सीधा प्रभावित करता है। उन्होंने किशोरावस्था को जीवन का एक संवेदनशील चरण बताते हुए कहा कि इस उम्र में सही मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक माहौल की सबसे अधिक जरूरत होती है। कार्यक्रम में सप्रेषण गृह की परिवीक्षा पदाधिकारी रूपा ठाकुर, गृहपति रवि महतो, प्रतिनियुक्ति शिक्षक कमलेश सिंह और विधि-सह-परिवीक्षा पदाधिकारी गोपाल पांडेय सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।


