
Chaibasa Treasury scam : झारखंड के चाईबासा ट्रेजरी से पुलिस विभाग के खातों से करीब 45 लाख रुपये की फर्जी निकासी का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में पुलिस ने एक सिपाही समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
हिरासत में लिए गए लोगों में पूर्व में एसपी ऑफिस के लेखा विभाग में तैनात सिपाही देवनारायण मुर्मू, उसके दो रिश्तेदार और एक करीबी शामिल हैं। चारों से शनिवार को पूरे दिन एसपी कार्यालय में पूछताछ की गई।
उच्चस्तरीय जांच टीम गठित
चाईबासा उपायुक्त मनीष कुमार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम बनाई गई है। टीम में एडीसी प्रवीण कुमार, सदर एसडीओ संदीप अनुराग, दो डीएसपी और वित्त मामलों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
जांच टीम पिछले दस वर्षों के वेतन, पेंशन और अन्य भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। सुबह से शाम तक एसपी ऑफिस में फाइलों और बैंक दस्तावेजों की गहन जांच की गई।
2016 से 2022 के बीच गड़बड़ी की आशंका
प्रारंभिक जांच में 2016 से 2022 के बीच वेतन, पेंशन और अन्य मद में 30 से 45 लाख रुपये तक की फर्जी निकासी की आशंका जताई गई है। आरोप है कि लंबित भुगतान और पेंशन राशि को सरकारी लाभार्थियों के खातों में भेजने के बजाय रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
देवनारायण मुर्मू वर्तमान में गोइलकेरा थाना में पदस्थापित है। उसे शुक्रवार को पूछताछ के लिए चाईबासा लाया गया था।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खातों का दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया है कि कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान वाले खातों का फायदा उठाया गया। जिन मामलों में लाभार्थी नियमित फॉलो-अप नहीं कर रहे थे, वहां राशि कथित रूप से अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
अब SIT करेगी डिजिटल जांच
रांची, हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी मामलों के बाद अब विशेष जांच दल (SIT) ने चाईबासा मामले को भी गंभीरता से लिया है। आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में एसआईटी अब डिजिटल फुटप्रिंट, डेटा टैम्परिंग और मनी ट्रेल की जांच करेगी।
जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि ट्रेजरी सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी वाउचर कैसे तैयार किए गए और सरकारी राशि निजी खातों में कैसे भेजी गई।
बैंक अधिकारी भी जांच के दायरे में
एसआईटी यह भी जांच करेगी कि जिन बैंक खातों के जरिए लेनदेन हुआ, उनमें केवाईसी नियमों का पालन हुआ या नहीं। संदिग्ध ट्रांजेक्शन के बावजूद बैंकों ने रिपोर्ट क्यों नहीं दी, इसकी भी पड़ताल होगी।
बैंक अधिकारियों के साथ डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों ने कहा है कि दोषियों की पहचान के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी और फर्जी निकासी की रिकवरी भी सुनिश्चित की जाएगी।

