

चांडिल: चांडिल बांध का जलस्तर लगातार बढ़ने और पानी की निकासी को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने विभाग और संबंधित अधिकारियों की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन को लेकर बैठकों में लिए गए फैसलों और जमीनी स्तर पर दिख रही तैयारियों के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है।





19 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, चांडिल बांध का जलस्तर 181.27 मीटर दर्ज किया गया। बांध से करीब 1867.780 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद जलस्तर बढ़ने से स्थानीय लोगों और बांध प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है।
बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद तैयारी पर सवाल
राकेश रंजन महतो ने सवाल उठाया कि जब मौसम विभाग लगातार बारिश को लेकर चेतावनी और पूर्वानुमान जारी कर रहा था, तो बांध के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए पहले से प्रभावी योजना क्यों नहीं बनाई गई।
उन्होंने पूछा कि यदि विभाग की नीति जलस्तर को 180 आरएल के आसपास बनाए रखने की थी, तो लगातार बारिश की स्थिति में जलस्तर 180 आरएल से ऊपर जाने की संभावना का पूर्व आकलन क्यों नहीं किया गया।
महतो ने कहा कि जलस्तर बढ़ने और संकट की स्थिति पैदा होने के बाद पानी छोड़ने की रणनीति बनाना आपदा प्रबंधन की पूर्व तैयारी नहीं कही जा सकती। उन्होंने यह भी सवाल किया कि आपदा प्रबंधन की बैठकों में लिए गए फैसले आखिर जमीन पर क्यों नजर नहीं आ रहे हैं।
चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ने की मांग
उन्होंने कहा कि भारी बारिश की संभावना पहले से थी तो बांध से पानी की चरणबद्ध निकासी पहले क्यों नहीं की गई, ताकि बाद में अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने की स्थिति उत्पन्न न हो।
महतो ने यह भी सवाल उठाया कि निचले इलाकों और जमशेदपुर में बाढ़ की संभावित स्थिति का पूर्व अनुमान विभाग के पास था या नहीं। उन्होंने बांध प्रबंधन से बारिश, जल आवक और निचले क्षेत्रों की क्षमता के आधार पर वैज्ञानिक एवं पूर्व निर्धारित जल प्रबंधन योजना सार्वजनिक करने की मांग की।
‘प्यास लगने के बाद कुआं नहीं खोदा जाता’
राकेश रंजन महतो ने कहा कि जल प्रबंधन केवल संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देने का विषय नहीं है। इसमें मौसम पूर्वानुमान, संभावित जल आवक, जलस्तर और निचले इलाकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी जरूरी है।
उन्होंने कहा, “प्यास लगने के बाद कुआं नहीं खोदा जाता। उसी तरह जलस्तर बढ़ने और बाढ़ का खतरा सामने आने के बाद योजना बनाने के बजाय बारिश के मौसम से पहले ही ठोस और वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार होनी चाहिए थी।”
पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
महतो ने विभाग से मांग की कि चांडिल बांध के जलस्तर, पानी की आवक और निकासी की स्थिति की नियमित और पारदर्शी जानकारी आम लोगों को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही विस्थापित परिवारों और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जलस्तर नियंत्रण के लिए पहले से क्या योजना बनाई गई थी और अब संभावित खतरे से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
