
कांग्रेस विधायक दल ने पूरी एकजुटता, अनुशासन और प्रतिबद्धता के साथ महागठबंधन समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है।
रांची : कांग्रेस के विधायकों और नेताओं ने शनिवार को कहा है कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों की संभावना रहती है। चुनाव परिणाम अपेक्षा के अनुरूप न रहने का अर्थ यह नहीं है कि बिना किसी तथ्य और प्रमाण के कांग्रेस विधायकों की निष्ठा और प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न लगाया जाए। विधायकों ने कहा कि भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्हें सोचना चाहिए कि क्यों वो किसी झारखंडी नेता अथवा कार्यकर्ता को अपना उम्मीदवार नहीं बना पाए? क्यों उन्हें ‘धनवानी जी’ को अपना उम्मीदवार बनाना पड़ा? ये सर्वविदित है कि कैसे पैसे का खेल हुआ? कैसे झारखंडी अस्मिता की बोली लगवाई गई ? क्योंकि अगर ये नहीं हुआ तो महागठबंधन के 56 वोट में से 6 वोट कहाँ गए? BJP और सहयोगी दलों के पास तो महज 24 वोट थे, उनके पास अतिरिक्त 6 वोट कहाँ से आए ?
जाहिर है, धोखा हुआ-विश्वासघात हुआ ! और ये धोखा महागठबंधन के दूसरे उम्मीदवार के साथ हुआ है तो उससे बड़ा धोखा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हुआ है। क्योंकि वो महागठबंधन दल के मुखिया हैं। उन्होंने परिश्रम किया था और सभी उनकी रणनीति से आस्वस्त थे। अब हम सभी को इंतज़ार है कि इस धोखे का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कैसे जवाब देंगे। हमें विश्वास है वो इसकी जांच करेंगे। और दोषी के ऊपर कार्रवाई करेंगे। हमारा शीर्ष नेतृत्व, सहयोगी दलों के शीर्ष नेतृत्व से बात कर रहा है। स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। इसलिए, हम अपने सहयोगी दलों से भी अपेक्षा करते हैं कि वे सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से बचें। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि किसी भी परिस्थिति में राजनीतिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। हम झारखंड के लोगों के हितों, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समय आपसी दोषारोपण का नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर आत्ममंथन तथा जनता के मुद्दों पर केंद्रित राजनीति करने का है। 2024 विधान सभा चुनाव के प्रचंड बहुमत के बाद इस राज्य सभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार के जीतना भाजपा की ‘प्रचलित सूटकेस- राजनीति को पुनर्स्थापित करता है। साथ ही हम सबों को भी अपने गिरेबान में झांकने को मजबूर करता है।

