रांची : कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने वाली भाजपा को सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने साफ संदेश दे दिया कि कांग्रेस न धमकियों से डरती है, न दबाव की राजनीति के आगे झुकती है। भाजपा के घेराव के ऐलान के बीच कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरी तैयारी के साथ कांग्रेस भवन में एकत्रित हुए और पार्टी का झंडा लेकर सुभाष चौक के पास भाजपा की घेराव की राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय घेराव और टकराव की राजनीति करती है, उसे पहले अपने शीर्ष नेतृत्व की भाषा और आचरण का हिसाब देना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े ‘50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ और ‘कांग्रेस की विधवा’ जैसे कथित बयानों को लेकर सवाल उठाना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। देश के प्रधानमंत्री का पद किसी को भी सार्वजनिक आलोचना से ऊपर नहीं कर देता। प्रधानमंत्री की कुर्सी जितनी बड़ी होती है, उससे जुड़ी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। ऐसे में राजनीतिक संवाद को व्यक्तिगत कटाक्षों तक गिराने वाली भाषा पर सवाल उठेंगे और उठते रहेंगे।
प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करना राजनीतिक साहस और विपक्ष द्वारा उस पर सवाल उठाना अपराध—यह दोहरा मापदंड आखिर कब तक चलेगा? भाजपा को बताना चाहिए कि जब विपक्ष के खिलाफ ऐसी भाषा इस्तेमाल होती है, तब उसकी नैतिकता कहां सो जाती है? और जब कांग्रेस उसी भाषा पर सवाल खड़े करती है, तो भाजपा को मिर्ची क्यों लगती है?
भाजपा शायद भूल रही है कि कांग्रेस कार्यालय कोई ऐसा दरवाजा नहीं है, जिस पर घेराव की घोषणा करके कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा जा सके। कांग्रेस कार्यकर्ता धमकियों से नहीं, विचारधारा और संविधान की ताकत से चलते हैं। भाजपा को घेराव की राजनीति का इतना ही शौक है, तो पहले अपने नेतृत्व की विवादित भाषा पर जवाब देने की हिम्मत दिखानी चाहिए।
भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या प्रधानमंत्री के पद की गरिमा केवल तब याद आती है, जब उनकी आलोचना होती है? क्या विपक्ष के नेताओं और महिलाओं के सम्मान की कोई कीमत नहीं है? लोकतंत्र में प्रधानमंत्री से सवाल पूछना देशद्रोह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है। कांग्रेस हर उस भाषा और राजनीतिक संस्कृति का विरोध करेगी, जो सार्वजनिक जीवन में सम्मान और मर्यादा को कमजोर करती है।
भाजपा को कांग्रेस को डराने का राजनीतिक भ्रम छोड़ देना चाहिए। कांग्रेस का इतिहास संघर्ष का इतिहास है और कांग्रेस का वर्तमान संविधान, लोकतंत्र तथा जनता के अधिकारों की रक्षा के संकल्प से जुड़ा है। घेराव की घोषणा से कांग्रेस की आवाज दबने वाली नहीं है; उलटे भाजपा को अपने ही सवालों का सामना करना पड़ेगा।
भाजपा को कांग्रेस भवन का घेराव करने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। विपक्ष को अपमानित करने वाली भाषा पर जवाब देने के बजाय विरोध का रास्ता अपनाना भाजपा की राजनीतिक बेचैनी को उजागर करता है। कांग्रेस जनता के मुद्दों पर सवाल पूछती रहेगी और किसी भी दबाव के आगे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से पीछे नहीं हटेगी।आज क़े कार्यक्रकम में रविंद्र सिंह, राकेश सिन्हा, राजेश गुप्ता छोटू, आलोक दुबे, किशोर सहदेव, सुरेंद्र सिंह, सोनल शांति, सुनील सिंह, राजन बर्मा, अख्तर अली, उज्जल तिवारी, दीपक ओझा, कामेश्वर गिरी, जगदीश साहू, फिरोज रिजवी, गौरव सिंह, सहबाज अहमद,राजू राम, नीतू देवी, मेरी तिर्की, टुन्ना, सहित सैकड़ो की संख्या में कांग्रेस जन उपस्थित थे।


