

रांची: 21वें गाजरघास (पार्थेनियम) जागरूकता सप्ताह के तहत दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र रामकृष्ण मिशन परिसर में पार्थेनियम उन्मूलन के साथ जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।





इस कार्यक्रम में RKMVERI के बी.एस.सी. एग्रीकल्चर और बी.वी.एस.ए. के विद्यार्थियों के साथ-साथ चान्हो प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए किसानों व ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को गाजरघास के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और इसके वैज्ञानिक व सुरक्षित प्रबंधन के प्रति प्रेरित करना था।
वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि पार्थेनियम एक आक्रामक खरपतवार है, जो फसलों के साथ जल, पोषक तत्व और प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करके उत्पादन को नुकसान पहुंचाता है। इसके परागकण और संपर्क में आने से मनुष्यों में त्वचा रोग, एलर्जी और सांस की तकलीफ हो सकती है, जबकि पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।
कार्यक्रम में सलाह दी गई कि पार्थेनियम को सीधे नष्ट करने के बजाय फूल आने से पहले सावधानीपूर्वक एकत्र कर कंपोस्ट, हरी खाद या दशपर्णी जैसे जैविक घोल में बदला जा सकता है।
हालांकि, किसानों को ताजा पार्थेनियम का सीधा इस्तेमाल न करने और संग्रहण के दौरान दस्ताने व जूते जैसे सुरक्षा उपाय अपनाने की हिदायत दी गई।
डॉ. मनोज कुमार सिंह और डॉ. सुरेश महतो के मार्गदर्शन में संपन्न इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने सवाल-जवाब के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
