

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब एक बार फिर चर्चा में है। राज्य सरकार की ओर से 342 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से नियुक्त अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, मामले पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।





342 अभ्यर्थियों को मिली थी नियुक्ति
11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के लिए JPSC ने वर्ष 2024 में विज्ञापन संख्या 01/2024 जारी किया था। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्य परीक्षा और मूल्यांकन को लेकर सवाल उठाए गए और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
विवाद के बीच आयोग ने अंतिम परिणाम जारी किया और कुल 342 अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें नियुक्ति दी गई। इसके बाद परीक्षा की प्रक्रिया और परिणाम को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को कानूनी विवाद में बदल दिया।
जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
मामले की सुनवाई के दौरान जनवरी 2026 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 342 सफल अभ्यर्थियों को मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया था। अदालत ने माना था कि मामले में होने वाला फैसला इन चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
सरकार ने रद्द कर दी थी नियुक्तियां
अगस्त 2026 में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया। सरकार ने 11वीं-13वीं JPSC समेत कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया। इस कार्रवाई के बाद उन 342 अधिकारियों की नियुक्तियां भी संकट में आ गईं, जिन्हें पहले ही सरकारी सेवा में नियुक्त किया जा चुका था।
सरकार के फैसले के पीछे CID जांच में सामने आए तथ्यों और कथित अनियमितताओं को आधार बताया गया।
हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक
सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर होने के बाद 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने सरकार के नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।
अदालत के इस आदेश के बाद 342 चयनित अधिकारियों को फिलहाल राहत मिल गई है। हालांकि, यह राहत अंतिम फैसला नहीं है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी रहेगी।
अब 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के स्टे के बाद अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। इस दौरान सरकार को अपने फैसले के आधार और उससे जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखना होगा।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद 342 अधिकारियों की नियुक्तियों पर तत्काल संकट टल गया है। लेकिन उनकी नौकरी का अंतिम भविष्य अगली सुनवाई और मामले में आने वाले अंतिम न्यायिक फैसले पर निर्भर करेगा।
