चेन्नई: द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन के नेतृत्व में शनिवार को पार्टी के संसदीय दल की बैठक में चार प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आलोचनाओं के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग भी शामिल है।

बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि बिहार, तमिलनाडु और कई अन्य राज्यों में जल्दबाजी में कराई गई एसआईआर प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं को सुनियोजित तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित किया गया।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने पार्टी के जुलाई 2025 से ही इस प्रक्रिया का लगातार विरोध करने का उल्लेख करते हुए निर्वाचन आयोग पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया।
बैठक में पारित प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके ‘‘एकतरफा’’ फैसलों की गहन जांच कराने की मांग भी की गई।
पार्टी ने चुनाव में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी युवा और छात्र आंदोलनों को पूरा समर्थन देने की बात कही। साथ ही, कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की कड़ी आलोचना करते हुए उन पर ‘‘राजनीतिक अवसरवाद’’ और भाजपा के साथ ‘‘गुपचुप नापाक गठजोड़’’ बनाए रखने का आरोप लगाया।
द्रमुक ने घोषणा की कि उसके सांसद जल्द ही राष्ट्रपति को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करने, जनता का भरोसा बहाल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों से मतदान कराने और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की पर्चियों की शत-प्रतिशत गिनती कराने की मांग की जाएगी।
बैठक में एसआईआर के मुद्दे पर ‘‘दोहरा रवैया’’ अपनाने के लिए कांग्रेस और टीवीके की आलोचना करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया।


