हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में एक घंटे का ब्लैकआउट, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज; DC ने लिया जायजा

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करीब एक घंटे तक बिजली गुल रहने से डॉक्टरों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा। घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया।

Razi Ahmad
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Sheikh Bhikhari Medical College Hospital : उत्तरी छोटानागपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मंगलवार देर रात हुए बिजली संकट ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक घंटे तक अस्पताल में बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण डॉक्टरों और नर्सों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा।

घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और 12 घंटे के भीतर उपायुक्त हेमन्त सती अस्पताल पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

मोबाइल की रोशनी में चला इलाज

करीब 300 बेड वाले अस्पताल में बिजली गुल होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वार्डों में अंधेरा छा गया, जबकि कई मरीजों के परिजन हाथ से पंखा झलते नजर आए।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च जलाकर मरीजों की जांच करनी पड़ी, वहीं नर्सें उसी रोशनी में दवाइयां और इंजेक्शन देती रहीं।

डीजल खत्म होने से नहीं चला जनरेटर

जानकारी के अनुसार, बिजली कटने के बाद बैकअप के तौर पर जनरेटर भी शुरू नहीं हो सका। अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि डीजल की कमी के कारण जनरेटर चालू नहीं किया जा सका, जिससे अस्पताल में लंबे समय तक अंधेरा बना रहा।

करीब एक घंटे बाद बिजली बहाल होने पर मरीजों और अस्पताल कर्मियों ने राहत की सांस ली।

DC ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

घटना की जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त हेमंत सती अस्पताल पहुंचे और विभिन्न विभागों के प्रमुखों (HODs) के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

उपायुक्त ने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अस्पताल में बड़े सोलर सिस्टम को दुरुस्त करने, अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगाने और बिजली बैकअप व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सांसद ने भी जताई चिंता

इस घटना पर सांसद मनीष जयसवाल ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जरूरत पड़ने पर डीजल उपलब्ध कराने की बात कही है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

गौरतलब है कि हाल ही में आयोजित दिशा समिति की बैठक में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर चिंता जताई थी। इसके बाद उप विकास आयुक्त को अस्पताल प्रशासन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बावजूद इसके, अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं को लेकर समस्याएं बरकरार हैं।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।