
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के वन संसाधनों के संरक्षण, विकास और वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर सोमवार को झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद से अब तक के सभी वन क्षेत्रों का टेक्निकल और डिजिटल रिकॉर्ड एक महीने के भीतर तैयार किया जाए।
उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जिससे महज एक क्लिक पर पूरे राज्य के वन क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति, संरचना और डिजिटल मैप की लेयरिंग देखी जा सके। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह और वन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दुमका, जामताड़ा और कोडरमा समेत सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से सीधे संवाद कर जमीनी प्रगति की जानकारी भी ली।
इको सिस्टम के आधार पर हो पौधारोपण
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पौधारोपण का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए। अनुपयोगी पेड़ों को लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीणों की आजीविका को ध्यान में रखकर महुआ, जामुन, कटहल, आंवला, करंज, पलाश, कुसुम, बैर और अर्जुन (तसर उत्पादन के लिए) जैसे फलदार और व्यावसायिक वृक्षों को बड़े पैमाने पर लगाने का निर्देश दिया। इससे लाह और तसर उद्योग को नई गति मिलेगी।
एक पेड़ लगाने पर पांच यूनिट मुफ्त बिजली
शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए सीएम ने व्यवस्थित शहरी पौधरोपण अभियान चलाने को कहा। इसके साथ ही सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया ताकि आम नागरिक इस अभियान से सीधे जुड़ सकें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री ने बड़े भू-भागों को चिन्हित कर काजू और बांस की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। बांस आधारित उद्योगों और बैम्बू क्राफ्ट के जरिए स्थानीय हस्तशिल्प को नया बाजार दिया जाएगा।
हेलीकॉप्टर से गिराए जाएंगे बीज
घने जंगलों के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने वन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के माध्यम से सीड बॉल्स (बीज) गिराने की बेहतर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया। इसके अलावा, राज्य सरकार की प्राथमिकता गिनाते हुए उन्होंने कहा कि पात्र लाभुकों के बीच वन पट्टा के लंबित मामलों का बिना किसी देरी के शीघ्र निष्पादन किया जाए।
झारखंड की समृद्ध जैव विविधता को राज्य की पहचान बताते हुए सीएम ने कहा कि यहां इको-टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं। इसके लिए वन विभाग और पर्यटन विभाग को आपसी समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, जंगली हाथियों के हमले में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को मुआवजा देने तथा फसल व घरों के नुकसान के भुगतान में तेजी लाने की हिदायत दी।
बैठक में पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वालों और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई। इसके लिए पारदर्शी और त्वरित निस्तारण हेतु ‘जनविश्वास एप’ के प्रभावी संचालन पर भी चर्चा की गई।

