धनबाद में बीसीसीएल सीएमडी ने रैयतों को भरोसा रखने का किया अनुरोध

News Aroma Media
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धनबाद: उपायुक्त सह प्रबंध निदेशक, झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार उमा शंकर सिंह तथा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक गोपाल सिंह ने शनिवार को अग्नि प्रभावित क्षेत्र के रैयतों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया।

कोयलांचल में भू-धंसान एवं अग्नि प्रभावित 595 साइट के रैयतों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित कराने के उद्देश्य से सीधा संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को सुना।

मौके पर झरिया, लोदना, गोधर, ब्लॉक 2, गडरिया, भौंरा, केंदुआडीह, पुटकी बलिहारी समेत अन्य क्षेत्र के रैयतों ने खुलकर अपने सुझाव और मांग को अधिकारियों के समक्ष रखा।

सुझाव सुनने के बाद उपायुक्त ने कहा कि भारत सरकार अग्नि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने के लिए गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।

रैयतों की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास पॉलिसी बनानी है। सब जगह बेलगड़िया मॉडल लागू नहीं होगा।

जनभागीदारी के साथ रैयतों की सूरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर पॉलिसी बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि संवाद के दौरान बेहतर सुझाव को सूचीबद्ध कर लिया गया है।

जिला प्रशासन ने पुनर्वास को गंभीरतापूर्वक लिया है। रैयत जिला प्रशासन पर विश्वास रखे।

संवाद के दौरान जो भी सुझाव आए हैं वे भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

इसका सकारात्मक परिणाम उभर कर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन कभी भी एकतरफा निर्णय नहीं लेगा।

जिला प्रशासन एवं बीसीसीएल को जितनी बार रैयतों के पास जाने की आवश्यकता होगी, उतनी बार जाएगा।

मौके पर बीसीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह ने कहा कि बीते वर्षों में रैयतों के साथ जो कुछ भी हुआ उसे भुला कर सभी को आगे बढ़ना है।

बीसीसीएल के सभी क्षेत्रों में समाधान केंद्र खोले हैं। यहां प्रत्येक गुरुवार को एरिया जनरल मैनेजर लोगों की समस्या को सुनेंगे।

सीएमडी ने सभी एरिया जनरल मैनेजर को इमानदारी पूर्वक समाधान केंद्र चलाने और रैयतों की बातों को सुनने का निर्देश दिया।

सीएमडी ने रैयतों को बीसीसीएल पर भरोसा रखने एवं नया अध्याय लिखने में सहभागिता निभाने का अनुरोध किया।

बैठक के दौरान बेलगड़िया की तर्ज पर फ्लैट नहीं बनाने, भूमि का अंश या मुआवजा देने, जहां बसाया जाए वहां मूलभूत उम्दा सुविधा मिलने, घर निर्माण के लिए यथोचित राशि देने, ऐसे स्थान पर विस्थापित करने जहां रोजगार या स्वरोजगार के साधन हो तथा जब तक पुनर्वास नहीं तब तक विस्थापन क्षेत्र में माइनिंग नहीं करने के सुझाव प्राप्त हुए।

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