


रांची : हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 8 सितंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता के महत्व को रेखांकित करने का अवसर नहीं है,बल्कि शिक्षा को मानव अधिकार, सामाजिक समानता, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की आधारशिला के रूप में स्थापित करने का संदेश भी देता है।





यूनेस्को ने 1966 में 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया और वर्ष 1967 से इसका आयोजन किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की पृष्ठभूमि वर्ष 1965 में तेहरान में आयोजित विश्व शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन से जुड़ी है।
इस सम्मेलन में निरक्षरता उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने पर बल दिया गया था। इसके बाद यूनेस्को के 14वें महासम्मेलन ने 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में औपचारिक मान्यता प्रदान की। भारत सरकार भी स्वतंत्रता के बाद से साक्षरता को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानती रही है तथा वर्ष 1988 में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की शुरुआत की गई थी।साक्षरता का अर्थ केवल अक्षर पहचानना या अपना नाम लिख लेना नहीं है।

आधुनिक युग में साक्षरता का दायरा पढ़ने-लिखने के साथ-साथ समझने, तार्किक विचार करने, जानकारी का सही उपयोग करने, डिजिटल माध्यमों को समझने और सही-गलत सूचनाओं में अंतर करने तक विस्तृत हो गया है। आज के डिजिटल युग में डिजिटल एवं मीडिया साक्षरता भी अत्यंत आवश्यक है। यूनेस्को भी साक्षरता को व्यापक ज्ञान, कौशल, मूल्यों और जीवनभर सीखने की क्षमता से जोड़ता है।
इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना, निरक्षरता के प्रति जागरूकता पैदा करना, बच्चों को विद्यालय से जोड़ना, वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देना तथा महिलाओं और वंचित वर्गों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना है।
साक्षर व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझ सकता है, रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकता है और सामाजिक एवं आर्थिक विकास में प्रभावी योगदान दे सकता है।साक्षरता सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
शिक्षा व्यक्ति में आत्मविश्वास पैदा करती है और उसे अंधविश्वास, भेदभाव तथा शोषण के विरुद्ध जागरूक बनाती है। एक शिक्षित परिवार अपने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के प्रति अधिक सजग होता है। इस प्रकार एक व्यक्ति की साक्षरता पूरे परिवार और समाज के विकास का आधार बन सकती है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की 60वीं वर्षगांठ है। तथा इस वर्ष का थीम है- लोगों,पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरता।
इस अवसर पर दुनिया भर में साक्षरता की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा की जा रही है।आज भी विश्व में करोड़ों युवा और वयस्क बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित हैं।
इसलिए अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि शिक्षा किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, लिंग, क्षेत्र या सामाजिक पृष्ठभूमि पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। हर व्यक्ति तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचाना ही सच्ची साक्षरता और समावेशी विकास की पहचान है।
