
रांची: झारखंड सरकार की ओर से अवैध भवनों को नियमित करने के लिए शुरू की गई ‘भवन नियमितीकरण योजना’ (रेगुलराइजेशन स्कीम) तकनीकी सुस्ती और पोर्टल शुरू न होने के कारण अधर में लटक गई है। योजना की अवधि समाप्त होने के एक महीने बाद भी नक्शा स्वीकृत करने की ऑनलाइन प्रक्रिया चालू नहीं हो सकी है, जिससे पूरे प्रदेश में 4542 आवेदक अनिश्चितता के माहौल में हैं।
नगर निकायों का स्पष्ट कहना है कि आवेदनों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, आपत्तियों का निस्तारण और नक्शा स्वीकृति जैसी तमाम प्रक्रियाएं ऑनलाइन पोर्टल से ही होनी हैं। पोर्टल के बंद रहने के कारण एक भी आवेदन पर आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। राज्यभर से मिले कुल 4542 आवेदनों में अकेले रांची नगर निगम से 1656 और आरआरडीए (RRDA) से 572 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

आवेदनों की कम संख्या के मुख्य कारण
योजना के तहत केवल अधिकतम 300 वर्गमीटर भूखंड पर बने जी+2 भवनों को ही नियमित करने का प्रावधान है। यदि भूखंड का क्षेत्रफल इससे अधिक है तो वह स्वतः योजना से बाहर हो जाता है। सड़क की चौड़ाई, फ्रंट, साइड और रियर सेटबैक का विवरण देना अनिवार्य किया गया है। कई भवन मालिकों को डर है कि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण के दौरान उनके निर्माण पर बुलडोजर चलाया जा सकता है।
अकेले रांची में डेढ़ लाख से अधिक भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बने हैं। इनमें बड़ी संख्या आदिवासी जमीन पर बने मकानों की है, जो वर्तमान नियमों के तहत नियमित नहीं किए जा सकते। अपेक्षा से कम आवेदन मिलने के कारण नगर विकास एवं आवास विभाग ने योजना की मियाद दिसंबर 2026 तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि इसे अभी राज्य सरकार से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। वहीं इस मामले में सुदिव्य कुमार नगर विकास मंत्री ने स्कीम का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले, इसके लिए अफसरों से बात की जाएगी। जल्द ही आवश्यक कदम उठाकर लोगों को राहत दी जाएगी।

