रांची : झारखंड के अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराने की दिशा में आखिरकार एक बड़ी पहल शुरू हो गई है। करीब सात वर्षों के लंबे संघर्ष और लगातार प्रयासों के बाद 5 नवंबर 2026 को रांची के कडरू स्थित हज हाउस में मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कोचिंग योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना की शुरुआत को झारखंड छात्र संघ एवं आमया संगठन के लंबे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सात साल पहले शुरू हुई थी मुफ्त कोचिंग की मांग

झारखंड छात्र संघ एवं आमया संगठन के एस० अली ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अल्पसंख्यक समुदाय के कई प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं UPSC, JPSC, JSSC, रेलवे, बैंकिंग, NEET और JEE जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से वंचित रह जाते थे। इसी समस्या को देखते हुए 17 जून 2019 को पहली बार झारखंड सरकार के समक्ष अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद 24 सितंबर 2020 को दोबारा आवेदन देकर इस मांग को उठाया गया।
तत्कालीन मंत्रियों ने भी दिखाई थी सहमति
एस० अली के अनुसार, तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। वित्तीय वर्ष 2021-22 में इसके लिए 50 लाख रुपये आवंटित करने की स्वीकृति भी दी गई थी। बाद में तत्कालीन हज कमेटी चेयरमैन डॉ. इरफान अंसारी और मंत्री हफीजुल हसन को भी योजना की आवश्यकता से अवगत कराया गया।
हफीजुल हसन की पहल पर हज हाउस में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें हाजी हुसैन अंसारी के नाम पर कोचिंग संचालन की सहमति बनी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में भी योजना के लिए दो-दो करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इस प्रकार कुल 4.50 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, लेकिन आवश्यक नियमावली तैयार नहीं होने के कारण योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
नियमावली से कैबिनेट की मंजूरी तक लंबा इंतजार
एस० अली ने बताया कि योजना को शुरू कराने के लिए उन्होंने बिहार के पटना हज हाउस और मुंबई हज हाउस में संचालित कोचिंग व्यवस्था की नियमावली भी विभाग को उपलब्ध कराई थी। लगातार पत्राचार और प्रयासों के बाद वर्ष 2024 में योजना की नियमावली तैयार की गई। इसके बाद कैबिनेट से मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कोचिंग योजना को मंजूरी मिली और 11 मार्च 2024 को इससे संबंधित सरकारी संकल्प जारी किया गया।
हालांकि, कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भी टेंडर और एजेंसी चयन की प्रक्रिया में करीब दो वर्ष का समय लग गया। इस दौरान राजमहल विधायक मोहम्मद ताजुद्दीन ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।
UPSC, NEET और JEE की कोचिंग शुरू नहीं होने पर जताई चिंता मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कोचिंग योजना शुरू होने पर एस० अली ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्याण विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा राज्य और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
हालांकि, योजना के शुभारंभ के बाद भी उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण कमियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फिलहाल UPSC, NEET और JEE जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग शुरू नहीं हुई है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जबकि योजना के प्रस्ताव और विभागीय संकल्प में इन सुविधाओं का उल्लेख किया गया था।
योजना को मूल उद्देश्य के अनुरूप विस्तारित करने की मांग
एस० अली ने राज्य सरकार से मांग की कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कोचिंग योजना को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप विस्तारित किया जाए। UPSC, NEET और JEE की कोचिंग के साथ विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का समान अवसर मिल सके।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाएगी, जिससे झारखंड के अल्पसंख्यक युवा भी प्रशासनिक, मेडिकल और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।


