अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं : विजया रहाटकर

अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने OTT मंचों पर महिलाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया।

News Aroma
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नयी दिल्ली: ओटीटी एवं अन्य मनोरंजन मंचों पर महिलाओं को अपमानजनक ढंग से दिखाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता तथा सभी स्ट्रीमिंग मंचों पर महिलाओं का सम्मान हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए।
रहाटकर ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को ठेस पहुंचाने या उसके अधिकारों का उल्लंघन करने की छूट मिल जाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति अपनी राय व्यक्त करना चाहता है या कोई बात लोगों तक पहुंचाना चाहता है तो उसे हमेशा महिलाओं की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो यह गलत है। किसी भी मंच पर इस तरह के व्यवहार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’’
ओटीटी मंच पर हिंसा, घरेलू हिंसा और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को दिखाए जाने को लेकर बढ़ती चिंताओं का जिक्र करते हुए रहाटकर ने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग ने हाल ही में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए देहरादून में दो दिवसीय प्रतीकात्मक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले हमने देहरादून में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें 20 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि आज ओटीटी मंच पर क्या दिखाया जा रहा है, चाहे वह हिंसा हो, घरेलू हिंसा हो या नशीले पदार्थों का इस्तेमाल और इन मुद्दों को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है।’’

रहाटकर के मुताबिक, 100 से अधिक संगठनों से जुड़े युवाओं ने भी डिजिटल मंचों पर दिखाई जा रही सामग्री को लेकर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा, ‘‘सभी की बातों में एक बात समान थी कि अपनी आजादी बढ़ाने का मतलब किसी दूसरे की आजादी कम करना नहीं हो सकता।’’
राष्ट्रीय महिला आयोग ने मनोरंजन और डिजिटल मंचों पर महिलाओं को अपमानजनक तरीके से पेश करने वाली कथित आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

मार्च में आयोग ने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ और ‘टटीरी’ गानों में कथित अश्लीलता और अभद्रता का स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद आयोग ने इन गानों से जुड़े कलाकारों, गायकों और निर्माण से जुड़े अन्य लोगों को समन जारी कर तलब किया था।
जून में आयोग ने गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान कथित तौर पर की गई टिप्पणियों को लेकर कॉमेडियन प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को भी समन जारी किया था। आयोग का कहना था कि ये टिप्पणियां एक महिला के प्रति यौन दबाव बनाने और उसकी सहमति के बिना किए जाने वाले व्यवहार को बढ़ावा देती प्रतीत होती हैं।

रहाटकर ने देहरादून में हुई चर्चा का हवाला देते हुए कहा, ‘‘कई प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि ओटीटी मंच मनोरंजन के लिए अच्छे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां हिंसा या महिलाओं का शोषण दिखाया जाए। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।’’
रहाटकर ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस मुद्दे पर लगातार चर्चा कर रहा है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘अपनी बात रखने और संवाद करने के तरीके में हमें महिलाओं की गरिमा और सम्मान हर हाल में बनाए रखना चाहिए।’’

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