रांची: झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता मृदुल राज ने SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “वोट जनता का संवैधानिक अधिकार है, किसी सरकार या चुनाव आयोग की मेहरबानी नहीं। मतदाता सूची के नाम पर एक भी वास्तविक मतदाता का अधिकार छीना गया तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।”

मृदुल राज ने कहा कि देशभर में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम बाहर किए जाने का आंकड़ा बेहद बड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से बाहर हुए हैं, जो प्री-SIR मतदाता सूची का लगभग 14.1 प्रतिशत है। दिल्ली में करीब 47.7 लाख और महाराष्ट्र में लगभग 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए। मृदुल राज ने कहा कि झारखंड में 43,61,987 नाम ASDD श्रेणी-Absent, Shifted, Dead और Duplicate-में ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर बदलाव के हर नाम और हर बूथ का पारदर्शी सत्यापन जरूरी है।
उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, Form-6, नाम हटाने-बहाल करने और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
झारखंड कांग्रेस की दो टूक मांगें
1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोष सिद्ध होने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।
2. देश में चल रही SIR प्रक्रिया तत्काल रद्द की जाए।
3. SIR से प्रभावित प्रत्येक मतदाता की बूथवार जांच और सत्यापन कराया जाए।
4. पूरे SIR और मतदाता डेटा सिस्टम का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
5. निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज 14 लिखित आपत्तियों और संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए।
मृदुल राज ने कहा, “देश में 13.37 करोड़ नाम और झारखंड में 43 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने के बाद अब सवालों से भागने का समय खत्म हो चुका है। चुनाव आयोग को देश और झारखंड की जनता को जवाब देना होगा। वोट काटने का कोई भी खेल लोकतंत्र में स्वीकार नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि हर वास्तविक मतदाता के वोट की रक्षा के लिए झारखंड कांग्रेस लोकतांत्रिक और संवैधानिक संघर्ष जारी रखेगी।


