रांची: भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने रांची में कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के घेराव को संवैधानिक संस्थाओं पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाने की एक नाकाम कोशिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि बीते 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की संयुक्त बैठक के बाद आयोग ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि एसआईआर (SIR) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसके बावजूद, कांग्रेस तथ्यों का सामना करने के बजाय सड़क पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रही है।

प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपना इतिहास खंगालना चाहिए। इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल को कांग्रेस ने बाद में राज्यसभा सांसद और केंद्र में मंत्री बनाया। इसी तरह नवीन चावला के मामले में तत्कालीन सीईसी एन. गोपालस्वामी ने उन्हें हटाने की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन यूपीए सरकार ने खारिज कर दिया और बाद में उन्हें ही सीईसी बना दिया गया, जबकि उनके पारिवारिक ट्रस्ट को कांग्रेसी सांसदों से चंदा मिलने के गंभीर आरोप लगे थे। इतना ही नहीं, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को भी कांग्रेस ने अहमदाबाद से अपना उम्मीदवार बनाकर चुनाव मैदान में उतारा था और 80 के दशक में मुख्य चुनाव आयुक्त आर.वी.एस. शास्त्री के अधिकारों को सीमित करने के लिए उनकी इच्छा के विरुद्ध दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर दी गई थी।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जिस ज्ञानेश कुमार पर आज आरोप लगाए जा रहे हैं, वे 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों की प्रक्रिया में शामिल तक नहीं थे, और उन चुनावों में भी जनता ने भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का घेराव करना लोकतंत्र की रक्षा नहीं, बल्कि संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने की राजनीति है। कांग्रेस को बेबुनियाद आरोप लगाने और हंगामा खड़ा करने के बजाय हिम्मत है तो तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर बात करनी चाहिए।


