रांची: कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (CMPFO) के 727.67 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने का निर्देश दिया है।

गुरुवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया। यह जनहित याचिका कोल इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी।
DHFL में लगाया गया था करीब 1300 करोड़ रुपये
मामला CMPFO की ओर से DHFL में किए गए निवेश से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि CMPFO ने DHFL में करीब 1300 करोड़ रुपये का निवेश किया था। DHFL के दिवालिया होने के बाद निवेश की बड़ी रकम फंस गई, जिसमें से करीब 727.67 करोड़ रुपये की राशि वापस नहीं हो सकी।
2019 में राशि वापस लेने की हुई थी कोशिश
याचिका के मुताबिक, 20 दिसंबर 2019 को CMPFO की बैठक में DHFL में फंसी रकम की वसूली के लिए जरूरी कदम उठाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद पूरी राशि वापस नहीं मिल सकी।
इसके बाद 22 नवंबर 2021 को इन्वेस्टमेंट सब-कमेटी की बैठक में 727.67 करोड़ रुपये को राइटऑफ करने का प्रस्ताव रखा गया। कर्मचारियों ने इस पर आपत्ति जताई और पूरे निवेश मामले की जांच की मांग की।
कर्मचारियों के फंड से जुड़ा है मामला
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह रकम कर्मचारियों के भविष्य निधि से जुड़ी है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि के निवेश, उसके फंसने और बाद में राइटऑफ किए जाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मामले में यह भी बताया गया कि राशि की भरपाई के लिए कोल इंडिया की ओर से कोयला उत्पादन पर प्रति टन 10 रुपये सेस लगाने का प्रस्ताव रखा गया था।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूरे मामले की जांच CBI करेगी। जांच के दौरान निवेश से जुड़े फैसलों, रकम के फंसने और उसकी वसूली के लिए किए गए प्रयासों समेत अन्य पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।


