


रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दो अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई करते हुए एक तरफ मृतका की सास समेत तीन रिश्तेदारों को बरी कर दिया, वहीं दूसरी ओर पति साजिद मियां की सजा को बरकरार रखा। साथ ही मृतका के ससुर को भी सबूत के अभाव में राहत दी गई है। यह फैसला हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनाया।





हाईकोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शमीम मियां, रशीदा बीबी और सकूरन बीबी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया था। केवल रिश्तेदारी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी कारण उनकी सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना पुख्ता और भरोसेमंद साक्ष्य के हत्या जैसे गंभीर अपराध में सजा देना सही नहीं है।
ससुर को भी मिली राहत
मृतका के ससुर आमिर मियां को भी सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया। कोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ भी कोई मजबूत प्रमाण नहीं था, जिससे दोष साबित हो सके।
पति की सजा बरकरार
हालांकि, पति साजिद मियां के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने के कारण उनकी उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने सही माना और उसमें कोई बदलाव नहीं किया।
क्या था पूरा मामला
यह मामला साल 2002 का है, जो लातेहार जिले से जुड़ा है। सैफन बीबी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आरोप था कि उसे ससुराल में प्रताड़ित किया जाता था, क्योंकि उसने दो बेटियों को जन्म दिया था। 14 मई 2002 को उसका शव पेड़ के नीचे बैठी अवस्था में मिला था, जिसके गले में कपड़ा बंधा हुआ था। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
