रांची: झारखंड में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं (JPSC और CGL) में हुए बड़े घोटाले में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें टीडीपीएल नामक कंपनी ने फर्जीवाड़ा करने के लिए यूपी, बिहार और झारखंड से कंप्यूटर विशेषज्ञों की एक विशेष टीम तैयार की थी। सीआईडी की जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इन कंप्यूटर एक्सपर्ट्स को किसी एजेंसी या सीधे तौर पर टीम में शामिल किया गया था, जिनका मुख्य काम परीक्षा केंद्र का संचालन, ओएमआर शीट और इमेज स्कैनिंग के साथ-साथ डेटाबेस तैयार करना था।
मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी की टीम वाईबीएन यूनिवर्सिटी पहुंची और शिवांगन कोचिंग के संचालक संजीत कुमार समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 38 वर्षीय संजीत कुमार पर कोचिंग चलाने के साथ-साथ अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराने के लिए एजेंट के रूप में काम करने का आरोप है। दूसरे आरोपी मिथिलेश कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसने अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए थे।
सीआईडी के अनुसार, आरोपी संजय कुमार भागलपुर ने सऊदी अरब की एक कंपनी छोड़कर टीडीपीएल में काम शुरू किया था, जिसे वर्ष 2025 में उस्मान नाम के व्यक्ति ने झारखंड बुलाया था। उस्मान को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, एक अन्य आरोपी रमेश कुमार वर्ष 2016 तक सामलीग के बीके इंस्टीट्यूट में इलेक्ट्रिकल इंस्ट्रक्टर था और बाद में जीएनएम और बीएससी नर्सिंग के अभ्यर्थियों की तलाश करने लगा। उसने चार छात्रों से 40 लाख रुपये लेकर अन्य आरोपी बुद्धेश्वर को देने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा लखनऊ के प्रदीप कुमार सिंह नामक कंप्यूटर एक्सपर्ट को भी गिरफ्तार किया गया है, जिससे पूरे नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े होने की पुष्टि हुई है।

