एमएमडीआर संशोधन कानून पर केंद्र के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराएगा झारखंड, वित्त मंत्री राधाकृष्ण उठाएंगे राज्य के अधिकार का मुद्दा

एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ झारखंड सरकार 17 सितंबर को दिल्ली में अपना पक्ष रखेगी। राज्य को 14 हजार करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का मुद्दा उठाया जाएगा।

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रांची: केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में 17 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में झारखंड सरकार एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास और नियमन) कानून में हुए संशोधनों के खिलाफ अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराएगी। राज्य सरकार की ओर से इस बैठक में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शामिल होंगे, जहां वे संशोधन के चलते झारखंड को होने वाले भारी आर्थिक नुकसान और राज्य के संवैधानिक व खनन अधिकारों में कटौती का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, इस नए संशोधन के लागू होने से चालू वित्तीय वर्ष में ही वाणिज्यिक भूमि पर मिलने वाले अनुमानित करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व से झारखंड को हाथ धोना पड़ सकता है।

झारखंड सरकार का स्पष्ट तर्क है कि एमएमडीआर कानून की धारा 2, 3 और 5 में बदलाव करके केंद्र सरकार राज्य के अधिकारों को सीमित कर रही है और अपने अतिक्रमण को बढ़ा रही है। खनन गतिविधियों से होने वाले सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक दुष्प्रभावों का सामना झारखंड को करना पड़ता है, लेकिन कानून में फेरबदल करके इसके राजस्व और नियंत्रण पर केंद्र अपना एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह कदम वित्तीय संघवाद की भावना के विपरीत है और सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों की भी अवहेलना करता है, जिनमें राज्यों को अपने संसाधनों पर अधिकार और गैर-अधिसूचित भूमि पर टैक्स लगाने के फैसले को सुरक्षित रखा गया था।

राज्य सरकार अब इस मामले में किसी भी स्तर पर पीछे हटने के मूड में नहीं है और कानूनन व लोकतांत्रिक दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ने के संकेत दे चुकी है। इसके लिए मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श करने का निर्देश दिया है। 17 सितंबर की दिल्ली बैठक में राज्य की ओर से एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ औपचारिक और मजबूत पक्ष रखा जाएगा। यदि केंद्र सरकार द्वारा राज्य के आर्थिक हितों और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई, तो झारखंड सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने से भी परहेज नहीं करेगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।