MMDR संशोधन विधेयक 2026 पर कांग्रेस का हमला, कहा- दिल्ली में बैठे लोग झारखंड की संपदा का हिसाब तय नहीं कर सकते

झारखंड के खनिज अधिकारों, MMDR संशोधन और 1.36 लाख करोड़ रुपये के कथित कोयला बकाये को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी।

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मेदिनीनगर : झारखंड की धरती से खनिज निकालकर दिल्ली की तिजोरी भरने की राजनीति अब नहीं चलेगी। भाजपा की केंद्र सरकार झारखंड को केवल खदान और यहां के खनिज को अपनी जागीर समझना बंद करे। झारखंड की छाती चीरकर निकलने वाले कोयले, लोहे और दूसरे खनिज पर सबसे पहला अधिकार झारखंड के लोगों का है। रविवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मृदुल राज और पंकज तिवारी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। नेताओं ने कहा कि दिल्ली में बैठकर कानून बदलने से झारखंड के अधिकार नहीं छीने जा सकते। मृदुल राज ने कहा कि “भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि झारखंड कोई ऐसा राज्य नहीं है, जहां से खनिज निकालिए और मुनाफा दिल्ली ले जाइए। जल, जंगल, जमीन और खनिज पर झारखंड के आदिवासी, मूलवासी और आम लोगों का अधिकार है।”

MMDR संशोधन पर कांग्रेस का सीधा हमला

कांग्रेस ने MMDR कानून में प्रस्तावित बदलावों को झारखंड के आर्थिक हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार को घेरा। मृदुल राज ने दावा किया कि इससे झारखंड को हर वर्ष करीब 15 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र झारखंड के राजस्व हिस्से को कमजोर करेगा और दूसरी तरफ राज्य से विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने की उम्मीद करेगा। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य की आय ही कम होगी, तो मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना और गरीबों-महिलाओं से जुड़ी योजनाओं का खर्च कैसे चलेगा? उन्होंने कहा, “झारखंड की खदान से पैसा निकलेगा और झारखंड खाली हाथ रह जाएगा-यह व्यवस्था अब स्वीकार नहीं होगी।”

₹1.36 लाख करोड़ के बकाये पर केंद्र को घेरा

पंकज तिवारी ने झारखंड के कथित ₹1.36 लाख करोड़ के कोयला बकाये का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से हिसाब मांगा। उन्होंने कहा कि झारखंड की जमीन से कोयला निकले, कंपनियां कारोबार करें और राज्य अपने बकाये के लिए बार-बार केंद्र का दरवाजा खटखटाता रहे, यह स्थिति बदलनी होगी। उन्होंने कहा, “झारखंड का खनिज चाहिए तो झारखंड का हिसाब भी देना होगा। संसाधन हमारा और फैसला दिल्ली का—यह दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।”

झारखंड के भाजपा सांसदों पर भी सवाल

कांग्रेस नेताओं ने झारखंड के भाजपा सांसदों को भी घेरा। उन्होंने पूछा कि जब राज्य के खनिज और आर्थिक अधिकारों पर चोट की बात आती है, तब भाजपा के सांसद चुप क्यों रहते हैं। कांग्रेस ने सवाल किया, “संसद में झारखंड की आवाज कब उठेगी? झारखंड का हक काटे जाने के वक्त आपकी चुप्पी किसके हित में है?”

राम मंदिर चंदे पर भी पारदर्शिता की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भी कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर जनता से प्राप्त धन के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

सड़क से सदन तक लड़ाई का ऐलान

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक अधिकारों की लड़ाई को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी ने MMDR संशोधन विधेयक 2026 को वापस लेने, राज्यों के खनिज अधिकारों की सुरक्षा और झारखंड के बकाये के भुगतान की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि झारखंड का कोयला, झारखंड का लोहा और झारखंड का खनिज केवल राजस्व का स्रोत नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य की पूंजी है। नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि केंद्र सरकार ने झारखंड के आर्थिक और खनिज अधिकारों की अनदेखी जारी रखी, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।