हाल-ए-झारखंड : परिजनों ने एंबुलेंस की जगह खाट से मरीज को पहुंचाया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

दुमका: जब भी विकास की बात होती है तो गांव और शहर दोनों के विकास के दावे किए जाते हैं।

पर हकीकत यह है कि विकास की दौड़ में गांव हमेशा पीछे ही रह जाते हैं और शहरों में सुविधाओं का जाल बिछ जाता है। लेकिन आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां चारों तरफ सन्नाटा-सा पसरा रहता है।

शहरों में विकास की गतिविधियां चलती हैं, तो गांव धीरे-धीरे अपना पारंपरिक स्वरूप खोने लगते हैं।

झारखंड में अब भी कई ऐसे गांव हैं जहां विकास लोगों से काफी दूर है, ऐसा ही कुछ दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड क्षेत्र में हुआ।

यहां चिचरो गांव के मंगरु राय की 14 वर्षीय बेटी रानिया कुमारी वज्रपात से सोमवार देर शाम गंभीर रूप से घायल हो गई।

उसे गंभीर हालत में खाट के सहारे परिजन एवं गांव वालों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, काठीकुंड में भर्ती कराया गया।

इस इलाके के चिचरो, हिरीडीह, शिखरपहाड, बरामसिया, जोड़ाआम जैसे दर्जनों ऐसे गांव है जहां पर बारिश के दिनों में चार पहिया वाहन नहीं जा पाती है।

चार पहिया वाहन कच्ची सड़क का कीचड़मय होने के कारण नहीं जा पाती है।

ऐसे में अगर किसी बीमार आदमी को अस्पताल पहुंचाना होता है तो मजबूरन खाट पर लादकर कई किलोमीटर ले जाने के बाद ही उसे एम्बुलेंस या किसी दूसरी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है इस सड़क के निर्माण से संबंधित मुखिया, अधिकारी और नेता को कई बार आवेदन दे चुके है। लेकिन आज तक सड़क की दुर्दशा नही सुधरी। जिस कारण ग्रामीणों में काफी आक्रोश व्याप्त है।

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