झारखंड में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले, प्रेग्नेंट महिलाएं तो हुई रजिस्टर्ड लेकिन 9 लाख बच्चों का पता नहीं

झारखंड के आरसीएच पोर्टल में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पंजीकरण आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। रिपोर्ट में 9 लाख से अधिक बच्चों के रिकॉर्ड गायब होने पर सवाल उठे हैं।

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झारखंड में एक साल में 82 लाख से अधिक योग्य दंपति ने कराया रजिस्ट्रेशन

78,24,460 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया स्वास्थ्य केंद्रों में

68,86,607 बच्चों का जन्म के बाद हुआ पंजीकरण

रांची: झारखंड में प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत परिवार नियोजन, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पंजीकरण का दायरा लगातार बढ़ रहा है। लेकिन विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जिसमें 9 लाख बच्चे मिसिंग है। ये हम नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर डाली गई रिपोर्ट कह रही है। जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 आंकड़ों के अनुसार राज्य में 82,67,235 योग्य दंपतियों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। आरसीएच पोर्टल पर जानकारी के मुताबिक राज्य में अब तक 78,24,460 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। जबकि 68,86,607 बच्चों को रजिस्टर्ड किया गया है। जिसमें 937853 बच्चे कहां गए इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

69,107 स्वास्थ्य कर्मी है तैनात

आंकड़ों के अनुसार राज्य में 69,107 स्वास्थ्य कर्मी भी इस कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं। ये स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इनके माध्यम से टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच, पोषण संबंधी परामर्श और परिवार नियोजन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के डैशबोर्ड में योग्य दंपत्ति की उपलब्धि 112.85 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में वर्षों से चल रहे आरसीएच कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों का समय पर पंजीकरण होने से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। इससे मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलती है। लेकिन वर्तमान के आंकड़े बता रहे हैं कि राज्य में शिशु मृत्यु दर भी कम नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के व्यवस्था में सुधार के दावे भी खोखले साबित हो रहे है।

क्या कहती है नोडल पदाधिकारी

प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम की राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ पुष्पा का कहना है कि कई बार गर्भवती महिला का रजिस्ट्रेशन तो होता है लेकिन उनका मिसकैरेज हो जाता है। कुछ महिलाएं मृत बच्चे को जन्म देती है। जबकि कुछ महिलाओं को कॉम्प्लिकेशन के कारण अबॉर्शन भी कराना पड़ता है। इसकी भी रिपोर्टिंग होती है। बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाने और इस गैप को कम करने का प्रयास जारी है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।