
इमरजेंसी वालों के लिए प्राइवेट ब्लड बैंक का सहारा
1570 रुपये लग रहे हैं एक यूनिट होल ब्लड के लिए
प्रोसेसिंग चार्ज के अलावा ब्लड भी करना है डोनेट
कैंप से भी नहीं जुट पा रहा डिमांड के अनुसार खून
स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा भी नहीं उतरी धरातल पर
खून के लिए रिम्स में दलालों का गैंग हो गया है एक्टिव
रांची: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स और सदर अस्पताल में इन दिनों खून की भारी किल्लत बनी हुई है। स्थिति यह है कि मरीजों के परिजन जब रिप्लेसमेंट डोनर लेकर पहुंच रहे हैं, तब भी उन्हें समय पर ब्लड नहीं मिल पा रहा है। खून की इस भारी कमी के कारण आपातकालीन स्थिति वाले मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं।
प्राइवेट ब्लड बैंक ही बन रहा सहारा
सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक खाली होने के कारण इमरजेंसी मरीजों को प्राइवेट ब्लड बैंकों का रुख करना पड़ रहा है। निजी केंद्रों पर एक यूनिट होल ब्लड के लिए 1570 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए यह राशि चुका पाना बेहद कठिन साबित हो रहा है। वहीं डोनर को साथ लेकर आना अनिवार्य है।
कैंपों से भी नहीं पूरी हो पा रही मांग
रक्तदान शिविरों के जरिए भी जरूरत के मुताबिक खून एकत्र नहीं हो पा रहा है। मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है, जिससे थैलेसीमिया, दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर सर्जरी वाले मरीजों का इलाज अधर में लटका हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री की ओर से अस्पतालों में पर्याप्त ब्लड उपलब्धता और व्यवस्था सुधारने को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावे पूरी तरह हवा-हवाई साबित हुए हैं। धरातल पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं और सरकारी दावों के बावजूद आम जनता को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। जब कि स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि एक कॉल पर जरूरतमंदों को खून उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए एजेंसी को रखने की बात कही गई थी।
रिम्स में सक्रिय हुआ दलालों का गैंग
ब्लड बैंक में इस गंभीर संकट का फायदा उठाकर रिम्स परिसर में दलालों का एक संगठित गैंग सक्रिय हो गया है। मजबूर परिजनों की बेबसी का फायदा उठाकर ये दलाल मोटे दामों पर खून उपलब्ध कराने का सौदा कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन सब जानते हुए भी इस पर ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
केस 1
रिम्स के सीटीवीएस में एक बच्ची को सर्जरी के लिए लाया गया था। उसे ए पॉजिटिव पैक्ड सेल की जरूरत थी। लेकिन डोनर रहने के बावजूद उसे नहीं मिल पाया। सेम ग्रुप का डोनर लाने को कहा गया। फिर परिजन प्राइवेट ब्लड बैंक गए।
केस 2
एम प्रकाश को बी पॉजिटिव खून की जरूरत थी। उन्होंने डोनर को बुलाया। डोनर के बावजूद उन्हें खून नहीं मिला। 2 से 3 ब्लड बैंक में हाथ पैर मारने के बाद उन्हें एक प्राइवेट ब्लड बैंक में खून मिल पाया।

