रांची: निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में नए मतदाताओं के लिए नाम जुड़वाने के नियमों को आसान कर दिया है। अब ऑनलाइन मतदाता नामांकन के लिए फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा देने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद आवेदकों को अब यह साबित करने के लिए अपने माता-पिता या दादा-दादी का 2003 की वोटर लिस्ट में नाम खंगालने और विवरण देने की आवश्यकता नहीं होगी। यह बदलाव मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और निर्वाचन आयुक्तों के बीच हुई बैठक में लिया गया। हालांकि, यह छूट फिलहाल केवल उन्हीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन राज्यों में अभी यह प्रक्रिया चल रही है, वहां पुराना नियम जारी रहेगा।

दावा-आपत्ति की समय सीमा समाप्त, अब घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ
दूसरी ओर, झारखंड में एसआईआर के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि बुधवार 30 सितंबर को समाप्त हो गई है। यद्यपि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने समय सीमा 60 दिन बढ़ाने का प्रस्ताव निर्वाचन आयोग को भेजा था, लेकिन आयोग की ओर से अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में पहले से तय निर्देशों के तहत नोटिसों के त्वरित निवारण के लिए अब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) सीधे मतदाताओं के घर-घर पहुंचेंगे।
झारखंड में इस अभियान के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 6.42 लाख से अधिक लोगों ने फॉर्म-6 भरा है। इसके अलावा विदेश में रहने वाले 106 भारतीय नागरिकों ने फॉर्म-6ए और नाम हटाने के लिए 12,275 लोगों ने फॉर्म-7 जमा किया है। अंतिम दिन बड़गाईं, कांके, शहर और सदर जैसे अंचल कार्यालयों में भारी भीड़ उमड़ी, जहां 2003 के पुराने कागजात न होने से बुजुर्गों और एनओसी न मिलने से किराएदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।


