


रांची: शिक्षक दिवस के मौके पर शनिवार को झारखंड में एक तरफ जहां कई जगह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक-कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने जा रहे हैं। राज्यभर में शिक्षक और कर्मचारी धरना-प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे। इस आंदोलन में करीब 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों के शामिल होने की बात कही जा रही है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में अनुदान राशि में बढ़ोतरी, राज्यकर्मी का दर्जा और सेवा शर्तों से जुड़ी नियमावली लागू करना शामिल है। रांची में लोक भवन के सामने प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद आंदोलन का तरीका बदल दिया गया है। अब अलग-अलग शिक्षण संस्थानों के मुख्य द्वार पर धरना देकर सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचा जाएगा।





राज्यभर में धरना-प्रदर्शन का ऐलान
वित्तरहित शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी शनिवार को अपने-अपने संस्थानों के मुख्य द्वार पर धरना देंगे। संगठन का कहना है कि इस आंदोलन के जरिए लंबे समय से लंबित मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखा जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि उनकी समस्याओं पर अब जल्द ठोस फैसला लिया जाना जरूरी है।
अनुदान राशि बढ़ाने की प्रमुख मांग
आंदोलन कर रहे शिक्षक-कर्मचारियों की प्रमुख मांग मौजूदा अनुदान राशि में 75 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में संस्थानों के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की जरूरतें पूरी करने के लिए अनुदान में पर्याप्त बढ़ोतरी जरूरी है।
राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग
वित्तरहित शिक्षण संस्थानों में काम कर रहे शिक्षक और कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देना भी आंदोलन की बड़ी मांगों में शामिल है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे कर्मचारियों की सेवा और भविष्य को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
सेवा शर्त नियमावली बनाने की मांग
धरना-प्रदर्शन के दौरान सेवा शर्तों से जुड़ी नियमावली बनाने की मांग भी उठाई जाएगी। शिक्षकों के मुताबिक, स्पष्ट नियमावली बनने से नियुक्ति, सेवा अवधि, सुविधाओं और दूसरे प्रशासनिक मामलों को लेकर स्थिति ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगी।
लोक भवन के सामने प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति
आंदोलनकारियों ने रांची स्थित लोक भवन के सामने प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम में बदलाव किया गया। अब रांची समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में संबंधित शिक्षण संस्थानों के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। शिक्षक-कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाएंगे और सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहे हैं।
