
रांची : पलामू प्रमंडल के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों युवाओं के साथ सोमवार को पूर्व मंत्री कमलेश सिंह और भाजपा के युवा नेता सूर्या सोनल सिंह ने प्रेसवार्ता की। इस दौरान झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) से मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाओं को बाहर किए जाने के फैसले का विरोध किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलेश सिंह ने कहा कि यह निर्णय पलामू, गढ़वा और चतरा के युवाओं के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की और कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
वहीं, सूर्या सोनल सिंह ने कहा कि जब झारखंड में क्षेत्रीय आधार पर भाषाओं को विकल्प दिया जाता है—जहां जरूरत है वहां उड़िया, बांग्ला और कई स्थानों पर उर्दू तक शामिल है—तो फिर पलामू प्रमंडल की प्रमुख भाषाओं को बाहर करना नीतिगत भेदभाव है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी भाषा के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सभी क्षेत्रों के युवाओं को समान अवसर मिलना चाहिए। सूर्या सोनल सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान पर भी आपत्ति जतायी, जिसमें कथित रूप से यह कहा गया कि मगही, भोजपुरी और अंगिका बोलने वाले झारखंडी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लाखों लोगों की पहचान और अस्मिता का अपमान है।
दोनों नेताओं ने कहा कि यदि इस निर्णय पर जल्द ही पुनर्विचार कर इसे वापस नहीं लिया गया, तो पूरे पलामू प्रमंडल में एक व्यापक और जोरदार जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित युवाओं ने भी एक स्वर में इस फैसले का विरोध करते हुए इसे क्षेत्रीय भेदभाव करार दिया और कहा कि वे अपने अधिकार के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं। अंत में नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई राजनीति की नहीं, बल्कि पलामू के युवाओं के अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई है, और इसे हर हाल में जारी रखा जाएगा।

