कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’ में दिखेगी 26/11 हमले की अनसुनी कहानी, नर्सों के साहस को किया गया सलाम

Manu Shrivastava
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कंगना रनौत एक बार फिर वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म लेकर दर्शकों के बीच आ रही हैं। उनकी आगामी फिल्म भारत भाग्य विधाता 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म वर्ष 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के दौरान कामा अस्पताल की उन नर्सों की बहादुरी पर आधारित है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की थी।

वास्तविक जीवन से जुड़ने का मिला अवसर

फिल्म में नर्स की भूमिका निभाने को लेकर कंगना ने कहा कि राजनीति में सक्रिय होने के बाद उन्हें आम लोगों के जीवन और संघर्षों को करीब से समझने का अवसर मिला। उनके अनुसार, कई बार कलाकार अपनी दुनिया में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि समाज की वास्तविक चुनौतियों से दूर हो जाते हैं। इस किरदार को निभाने के लिए उन्हें विशेष तैयारी और मेहनत करनी पड़ी।

कैसे मिला ‘भारत भाग्य विधाता’ नाम?

कंगना ने बताया कि फिल्म का शुरुआती नाम “नर्सेस ऑफ कामा” रखा गया था। बाद में इसे बदलकर “भारत भाग्य विधाता” किया गया। उनके अनुसार यह नाम देश के श्रमिक वर्ग के सम्मान से जुड़ा हुआ है और उन्हें यह बेहद प्रेरणादायक लगा। दिलचस्प बात यह है कि इस शीर्षक के अधिकार जॉन अब्राहम के पास थे। कंगना ने बताया कि जॉन ने बिना किसी शुल्क के यह शीर्षक फिल्म को उपयोग करने की अनुमति दे दी, जिसके लिए वह उनकी आभारी हैं।

रणवीर सिंह विवाद पर क्या बोलीं कंगना?

हाल ही में रणवीर सिंह से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने कहा कि सफलता के साथ आलोचना और विरोध भी बढ़ते हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके करियर में भी कई बार विरोध और प्रतिबंध जैसी परिस्थितियां आईं, लेकिन समय के साथ सब कुछ बेहतर हो गया।

26/11 हमले की यादें आज भी ताजा

मुंबई के 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमलों को याद करते हुए कंगना ने बताया कि उस समय वह संघर्ष के दिनों में थीं। एक मित्र के घर पर मौजूद रहने के दौरान उन्हें इस हमले की जानकारी मिली। उनके अनुसार शुरुआत में स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाना मुश्किल था, लेकिन बाद में पूरे देश ने उस त्रासदी को महसूस किया।

आगे भी आएंगी ऐसी प्रेरणादायक कहानियां

कंगना का मानना है कि देश में कई ऐसे अनसुने नायक और नायिकाएं हैं, जिनकी कहानियां लोगों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को “साइलेंट हीरोज” बताते हुए कहा कि यदि दर्शकों को यह फिल्म पसंद आती है, तो भविष्य में भी ऐसे कई प्रेरक विषयों पर फिल्में बनाई जा सकती हैं।

“भारत भाग्य विधाता” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उन साहसी नर्सों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने संकट की घड़ी में मानवता को सबसे ऊपर रखा। यह फिल्म साहस, सेवा और कर्तव्य की एक प्रेरणादायक कहानी दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास करती है।

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