लोकसभा में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े सवालों के तीन सेट अस्वीकार किए गए

लोकसभा में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े सवालों के तीन सेट खारिज किए गए। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने फैसले की आलोचना करते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

Razi Ahmad
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नयी दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सवालों के तीन सेट संसद के हालिया मॉनसून सत्र के दौरान मंज़ूरी की शर्तों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिए गए। संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को इस फैसले की आलोचना करते हुए यह बात कही।

दास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि द्रमुक के लोकसभा सदस्य मथेश्वरन वी.एस. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से सवालों के तीन सेट के ज़रिए जवाब मांगे थे, जिनके नोटिस संदर्भ नंबर 101799 और 101801 थे।

दास ने कहा कि इन सवालों में नीट-यूजी 2026 के लिए आवेदन शुल्क वापसी, सरकार के प्रति लोगों का बढ़ता अविश्वास, दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी और साफ़-सफ़ाई की सुविधा न देना, प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ सरकार का व्यवहार, छात्रों का कल्याण, पेपर लीक और शिक्षा में सुधार, तथा शांतिपूर्ण  विरोध के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के साथ बर्ताव के बारे में जानकारी मांगी गई थी। उन्होंने कहा कि ‘‘पूरी तरह से उचित सवालों’’ को खारिज करने के लिए ‘‘बहुत अजीब तर्क’’ दिए गए।

दास ने कहा कि नियम 41(2) का हवाला देते हुए सवालों को नामंज़ूर कर दिया गया।

संपर्क करने पर, मथेश्वरन ने पुष्टि की कि सवालों को नामंजूर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी लोकसभा सदस्य पोर्टल के ज़रिए मिली। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, दास ने विरोध प्रदर्शनों से निपटने के मामले में संसद के प्रति सरकार की जवाबदेही का मुद्दा उठाया।

दास ने कहा, ‘‘अगर संसद में ये सवाल नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार को असल में कहां जवाबदेह ठहराया जाएगा? क्या विरोध-प्रदर्शनों के ज़रिए? उन अहम हफ्तों में गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया?’’

उन्होंने कहा, ‘‘कार्यपालिका से सवाल पूछने का सांसद का अधिकार कोई प्रक्रियात्मक परेशानी नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की आत्मा है। प्रश्नकाल इसलिए होता है क्योंकि व्यापक सार्वजनिक शक्ति का इस्तेमाल करने वाले मंत्रियों को जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को जवाब देना होता है। वरना, ज़ाहिर है, लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।’’

दास ने कहा, ‘‘आप संसद की आवाज नहीं दबा सकते और उसे अपनी अधूरी नीतियों के लिए ‘रबर-स्टाम्प’ नहीं बना सकते। आप युवाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। भारत के बारे में हमारी सोच ऐसी नहीं है।’’

लोकसभा की वेबसाइट के अनुसार, सवालों की स्वीकार्यता नियम 41 से 44 के साथ-साथ अध्यक्ष के निर्देशों, संसदीय मिसालों और स्थापित परंपराओं से तय होती है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।