महुआडांड़ के लाल डॉ. प्रकाश बड़ाइक का निधन: सेवा और समर्पण की मिसाल चली गई, क्षेत्र में शोक

महुआडांड़ के चर्चित चिकित्सक डॉ. प्रकाश बड़ाइक का ब्रेन हेमरेज से निधन, सेवा, समर्पण और सरल स्वभाव के लिए प्रसिद्ध डॉक्टर के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक।

News Aroma
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महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर पंचायत निवासी और चंदवा प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोहरसी में पदस्थापित चर्चित चिकित्सक डॉ. प्रकाश बड़ाइक 50 वर्ष का रांची के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके असमय निधन की खबर मिलते ही महुआडांड़, नेतरहाट, बालूमाथ और चंदवा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।जानकारी के अनुसार पिछले शनिवार को ड्यूटी के दौरान डॉ. बड़ाइक अचानक चंदवा स्वास्थ्य केंद्र में अपनी कुर्सी से गिर पड़े थे। आनन-फानन में उन्हें रांची रेफर किया गया। जांच में ब्रेन हेमरेज की पुष्टि हुई। कुछ दिनों तक इलाज चला लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉ. बड़ाइक अपने सरल स्वभाव और सेवा भाव के लिए जाने जाते थे। वे 2007 से 2009 तक महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने अपनी कार्यशैली से लोगों का भरोसा जीता। ड्यूटी के बाद भी वे सरकारी आवास में जरूरतमंद मरीजों का इलाज कर देते थे। 2016 में स्थानांतरण होकर वे नेतरहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और 2020 तक वहां सेवा दी। कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी उन्होंने निस्वार्थ भाव से काम कियानेतरहाट के बाद उन्हें बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का चिकित्सा प्रभारी बनाया गया। करीब दो साल वहां रहने के बाद वर्तमान में वे चंदवा प्रखंड के लोहरसी PHC में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।डॉ. बड़ाइक अपने पीछे वृद्ध पिता, एक दिव्यांग भाई और लगभग 11 व 7 वर्ष के दो बेटों को छोड़ गए हैं। उनका परिवार रांची के लालगुटवा में रहता है। उनकी चचेरी बहन संगीता बड़ाइक ने बताया कि वे छोटे-बड़े सभी से आत्मीयता से मिलते थे और हमेशा लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते थे।

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