
महुआडांड: सरकारी आंकड़ों में भले ही शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर होने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन महुआडांड प्रखंड की जमीनी हकीकत इन दावों से अलग तस्वीर दिखा रही है। यहां शिक्षा की नींव माने जाने वाले दर्जनों सरकारी स्कूल जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। कहीं छत से पानी टपक रहा है तो कहीं दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई स्कूलों को सुरक्षा कारणों से दूसरे विद्यालयों में मर्ज कर दिया गया है। वहीं, जिन स्कूल भवनों की हालत पूरी तरह खराब हो चुकी है, वहां बच्चे मजबूरी में आंगनबाड़ी केंद्रों और तिरपाल के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
जर्जर भवनों में चल रही बच्चों की पढ़ाई
महुआडांड प्रखंड के दूर-दराज के गांवों में सरकारी स्कूलों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर हर बच्चे को बेहतर शिक्षा देने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर बच्चों को पढ़ने के लिए सुरक्षित भवन तक उपलब्ध नहीं हैं। जर्जर स्कूल भवनों को देखते हुए प्रशासन ने कई प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को पास के स्कूलों में मर्ज कर दिया है। इसका असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। 6 से 10 साल के बच्चों को रोजाना एक से दो किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे गांव जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जहां दूसरे स्कूलों में जाने की सुविधा नहीं है, वहां शिक्षक आंगनबाड़ी केंद्रों के छोटे से कमरे या फिर खुले मैदान में तिरपाल लगाकर बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हैं। बारिश, तेज धूप और आंधी के कारण कई बार पढ़ाई प्रभावित हो जाती है।
एक कमरे में आंगनबाड़ी और स्कूल, बढ़ी परेशानी
आंगनबाड़ी केंद्रों में स्कूल संचालित होने से नई समस्या खड़ी हो गई है। जिन केंद्रों में पहले 3 से 5 साल के बच्चों के लिए गतिविधियां चलती थीं, वहीं अब 6 से 12 साल के स्कूली बच्चों को भी बैठना पड़ रहा है। जगह की कमी के कारण न तो आंगनबाड़ी का काम सही तरीके से हो पा रहा है और न ही स्कूल की पढ़ाई। कई जगहों पर ब्लैकबोर्ड, बेंच और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों में बच्चों को पढ़ाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी जल्द कार्रवाई
स्कूल भवनों की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि जर्जर स्कूलों का जल्द सर्वे कराया जाए और नए पक्के भवनों का निर्माण शुरू किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि महुआडांड को अनुमंडल बने 16 साल हो चुके हैं। इस दौरान सड़कें बनीं और सरकारी कार्यालय खुले, लेकिन बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल भवन की समस्या अब भी बनी हुई है। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि क्या सुरक्षित और बेहतर शिक्षा पाना उनके बच्चों का अधिकार नहीं है? उनका कहना है कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि हर पंचायत में मजबूत और सुविधायुक्त स्कूल भवन बनाए जाएं, ताकि महुआडांड के बच्चे भी सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकें। अभिभावकों का कहना है कि जब तक बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ स्कूल नहीं मिलेगा, तब तक शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावे अधूरे ही रहेंगे।

