कोरोना के इलाज में कारगर हो सकती है अर्थराइटिस की दवा कोल्चीसीन, ट्रायल को मंजूरी

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नई दिल्ली: कोरोना महामारी से लड़ने के लिए रोज नए हथियार खोजे जा रहे हैं।

इसके खिलाफ कारगर दवाओं में समय के साथ बदलाव किया गया है।

अब गठिया के इलाज में काम आने वाली दवा कोल्चीसीन के कोरोना के खिलाफ प्रभावी माना जा रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक कोल्चीसीन को कोरोना के नए वैरिएंट बी.1.617.2 के इलाज में प्रभावी माना जा रहा है।

एक अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है।

दवा के ट्रायल में देखने को मिला कि इससे कोरोना संक्रमित मरीजों में हार्ट संबंधी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

ट्रायल से संबंधित एक अध्ययन न्यू इग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में भी प्रकाशित हुआ था।

अब आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने इस दवा के बारे में और आंकड़े जुटाने शुरू कर दिए हैं।

साथ ही ड्रग डीसीजीआई से प्री क्लीनिकल ट्रायल के बाद कोल्चीसीन के दूसरे और तीसरे फेस के ट्रायल की इजाजत भी मांगी थी जिसे अब हरी झंडी मिल गई है।

अमेरिका से लेकर भारत में इस दवा पर रिसर्च जारी है, ताकि कोरोना के खिलाफ जंग में एक नया हथियार मिल सके।

भारत के 4 अस्पतालों में करीब 300 मरीजों पर इस दवा का ह्यूमन ट्रायल किया जा रहा है।

कोल्चीसीन को लेकर अन्य देशों में अब तक किए गए अध्ययन से एक और बड़ी बात निकलकर सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक यह दवा बीमारी को गंभीर होने से रोकती है।

साथ ही मरीजों की वेंटिलेटर पर निर्भरता और मृत्यु दर को कम करती है।

बावजूद इसके अब तक किसी भी देश ने कोरोना के इलाज के लिए इस दवा को मंजूरी नहीं दी है।

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