मुंबई : शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शप) ने निर्वाचन आयोग के अंदर उभरते मतभेद की खबरों पर चर्चा के लिए बुधवार को तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उसने कहा कि यह मुद्दा हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है तथा इसे राजनीतिक मामले के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। राकांपा (शप) की सांसद सुप्रिया सुले ने दिल्ली में संवाददाताओं द्वारा निर्वाचन आयोग में मतभेद की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा,‘‘अगर तंत्र ही ढहने वाला है, तो हम किस पर भरोसा करें?’’
उन्होंने कहा कि यह मामला ‘बहुत, बहुत गंभीर’ है और उस पर राजनीतिक दलों के बीच खुली चर्चा की जरूरत है।
सुले ने कहा, ‘‘यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह देश के हर नागरिक के अधिकारों से जुड़ा है। अब यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।’’

उन्होंने कहा कि इन आरोपों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उनमें कोई सच्चाई है या नहीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘‘पद से हट जाना’’ चाहिए, तो सुले ने कहा कि इस बात पर खुली चर्चा होनी चाहिए कि क्या आरोप सच हैं। उन्होंने इन दावों को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया कि दो चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के कई ऐसे निर्णयों पर आपत्ति जताई थी जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। पश्चिमी महाराष्ट्र के बारामती निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘अगर तंत्र ही ढहने वाला है, तो हम इस देश में किस पर भरोसा करें?’’
उन्होंने एक खबर का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया है कि एसआईआर के दौरान 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के कदमों पर 14 बार आपत्ति जताई थी।
सुले ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता को ‘खत्म’ कर दिया है।


