नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक मामले में बुधवार को दिल्ली की एक अदालत में एक आरोपी के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने 14वें आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी उर्फ राज सूर्यवंशी के वकील को पूरक आरोपपत्र की एक प्रति उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार के लिए निर्धारित की। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र के नांदेड़ का रहने वाला सूर्यवंशी इस मामले के सह-आरोपी शुभम खैरनार का करीबी सहयोगी है। सूर्यवंशी को दो सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।

पूरक आरोपपत्र के अनुसार, सूर्यवंशी ने खैरनार के साथ मिलकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र कई अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया और उनके परिवारों से पैसे लिए। सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि सूर्यवंशी ने अभ्यर्थियों को नांदेड़ में एक स्थान पर एकत्र होने के लिए कथित तौर पर कहा था, जहां उन्हें प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि सूर्यवंशी ने अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पहचान पत्र जैसे मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे परीक्षा के बाद पैसे चुका दें।
सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने और अन्य अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष त्वरित अदालत ने सीबीआई की ओर से 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र पर 12 अगस्त को संज्ञान लिया था। पहले दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, सीबीआई ने 13 मई को इस मामले में कार्रवाई शुरू की थी और सबसे पहले राजस्थान से मांगीलाल, दिनेश और विकास बिवाल को गिरफ्तार किया था। उनके मोबाइल फोन में लीक हुए प्रश्नपत्र की पीडीएफ फाइल मिली थीं, जो उन्हें 29 अप्रैल को ‘टेलीग्राम’ के जरिए भेजी गई थीं। एजेंसी ने उसी दिन गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया था।
सीबीआई ने 13 मई को पुणे से धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया था। उसने सबूत मिटाने के लिए अपना मोबाइल फोन नष्ट करने की कथित तौर पर कोशिश की थी लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन पुणे से मनीषा संजय वाघमारे को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी की ओर से पहले दाखिल अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, वाघमारे ‘‘पैसों के बदले नीट-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र लीक करने और उन्हें अन्य लोगों तक पहुंचाने की साजिश रचने वाले मुख्य आरोपियों में शामिल थी।’’ वह ‘‘अभ्यर्थियों और विषय विशेषज्ञों के बीच संपर्क का काम करती थी।’’ इन आरोपियों से पूछताछ के बाद सीबीआई ने 15 मई को लातूर से इस मामले के कथित सरगना पी. वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। इसके बाद 16 मई को पुणे से मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया गया। लातूर में एक कोचिंग सेंटर के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर को 17 मई को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में सीबीआई ने 22 मई को लातूर से मनीषा संजय हवलदार और 26 मई को पुणे से तेजस शाह एवं लातूर से डॉ. मनोज शिरुरे को गिरफ्तार किया था।
सीबीआई ने दावा किया है कि मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच से इस साजिश का खुलासा हुआ। इस जांच के दौरान व्हाट्सऐप पर हुई ऐसी बातचीत और लीक हुए प्रश्नपत्रों की पीडीएफ फाइल बरामद की गईं, जिन्हें मोबाइल फोन से मिटा दिया गया था। नीट-यूजी का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए करती है। प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच एनटीए ने तीन मई को आयोजित परीक्षा 12 मई को रद्द कर दी थी। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी। नीट प्रश्नपत्र लीक मामला एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था और इसे लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने किया था। विरोध प्रदर्शनों के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।


