
Palamu Tiger Reserve : पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जो पिछले लगभग 50 वर्षों से एक अनोखी प्रशासनिक और भौगोलिक विसंगति के कारण चर्चा में बना हुआ है।
पूरा जंगल लातेहार में, लेकिन दफ्तर पलामू में
इस रिजर्व का अधिकांश वन क्षेत्र लातेहार जिले में फैला हुआ है, लेकिन इसका मुख्यालय मेदिनीनगर (पलामू जिला) में स्थित है।
यानी बाघों और जंगल की सुरक्षा का सीधा प्रशासनिक नियंत्रण लातेहार से नहीं, बल्कि पलामू से संचालित होता है।
1973-74 से जारी व्यवस्था
प्रोजेक्ट टाइगर के तहत 1973-74 में गठन के बाद से ही PTR का मुख्य कार्यालय मेदिनीनगर में ही संचालित हो रहा है। फील्ड डायरेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी वहीं से सभी बड़े निर्णय लेते हैं—चाहे वह बजट हो या संरक्षण की रणनीति।
दूरी बनी बड़ी चुनौती
मुख्यालय और रेंजों के बीच 25 से 100 किलोमीटर तक की दूरी फील्ड स्टाफ के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है।
* बेतला: 25 किमी
* छिपादोहर (पूर्व): 35–40 किमी
* छिपादोहर (पश्चिम): 40–45 किमी
* कुटकु: 50–55 किमी
* गारू (पूर्व): 60 किमी
* गारू (पश्चिम): 65 किमी
* बारेसांढ़: 85 किमी
* महुआडांड़: 100 किमी
इस दूरी के कारण रेंजरों और फील्ड अधिकारियों को हर छोटे-बड़े काम के लिए मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
भौगोलिक संरचना
पलामू टाइगर रिजर्व का क्षेत्र कई नदियों और जंगलों से घिरा हुआ है। उत्तर में औरंगा नदी, दक्षिण में नेतरहाट के जंगल, और पूर्व-पश्चिम में अन्य वन क्षेत्र इसकी सीमा तय करते हैं।
* कोर एरिया: लगभग 414.08 वर्ग किमी
* बफर एरिया: लगभग 715.85 वर्ग किमी
50 साल पुरानी बहस
यह प्रशासनिक व्यवस्था आज भी सवालों के घेरे में है कि जब पूरा जंगल लातेहार में है, तो उसका नियंत्रण पलामू से क्यों चल रहा है। यही विसंगति PTR की कार्यप्रणाली और त्वरित निर्णय क्षमता पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

