

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और जनगणना को लेकर कई अहम बातें कहीं। उनके भाषण में मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग से लेकर ‘दिमागी नक्सलियों’ की पहचान तक कई मुद्दे चर्चा में रहे।




प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी होगी आसान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग का बढ़ता खर्च मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए बड़ा बोझ बन गया है। कई अभिभावकों को लगता है कि यदि उनका बच्चा कोचिंग नहीं करेगा तो वह प्रतियोगिता में पीछे रह जाएगा। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
घर से पढ़ाई, परिवार पर कम होगा आर्थिक बोझ
पीएम मोदी ने कहा कि युवाओं को पढ़ाई के लिए परिवार से दूर जाकर महंगी कोचिंग लेने की जरूरत कम होनी चाहिए। देश के पास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिभाशाली शिक्षक-शिक्षिकाओं की बड़ी क्षमता है। सरकार इसी संसाधन का इस्तेमाल कर युवाओं को बेहतर तैयारी का अवसर देना चाहती है।
जनगणना में युवाओं से मांगा सहयोग
प्रधानमंत्री ने Census 2027 में युवाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे सरकार की नीतियों और विकास की योजनाओं को दिशा मिलती है। उन्होंने युवाओं से अपने घर और आसपास लोगों के बीच भागीदारी का माहौल बनाने की अपील की।
‘दिमागी नक्सलियों’ को पहचानने की अपील
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में नक्सलवाद और माओवादी हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया और सुरक्षा बलों समेत हजारों लोगों की जान गई। उन्होंने ‘दिमागी नक्सलियों’ की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की बात कही और दावा किया कि देश में माओवादी हिंसा अब अंतिम दौर में है।

