गठबंधन सरकार में बेलगाम हुए अधिकारी, मुख्यमंत्री की चुप्पी से प्रशासनिक अराजकता को मिल रहा संरक्षण : प्रदीप सिन्हा

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने झारखंड सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों की मनमानी और मुख्यमंत्री की चुप्पी से लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

News Aroma
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड की गठबंधन सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में अधिकारियों पर सरकार का नियंत्रण लगभग समाप्त हो चुका है। परिणामस्वरूप प्रशासनिक अनुशासन कमजोर हुआ है और जनता से जुड़े मामलों में जवाबदेही लगातार घटती जा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों के निर्देशों की अनदेखी होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार स्वयं अपने प्रशासनिक तंत्र पर नियंत्रण बनाए रखने में असफल है। हाल के दिनों में प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी के साथ देवघर के पुलिस अधीक्षक के व्यवहार ने पूरे राज्य में प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

प्रदीप सिन्हा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू द्वारा किए गए फोन का अधिकारियों द्वारा उत्तर तक नहीं दिया जाना उनके गैर-जिम्मेदार रवैये को दर्शाता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब सत्ता के संरक्षण में प्रशासन का दुरुपयोग हुआ हो। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के विरुद्ध देशद्रोह जैसा गंभीर मुकदमा दर्ज कराया गया था, जो राजनीतिक प्रतिशोध का स्पष्ट उदाहरण था। आज भी वही मानसिकता प्रशासनिक कार्यप्रणाली में दिखाई दे रही है।

प्रदीप सिन्हा ने कहा कि भारतीय संविधान ने विधायिका और कार्यपालिका दोनों के अधिकार एवं दायित्व स्पष्ट रूप से निर्धारित किए हैं। जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से संवाद करते हैं, इसलिए अधिकारियों का दायित्व है कि वे संवैधानिक मर्यादा, जवाबदेही और शिष्टाचार का पालन करें। यदि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करेंगे, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी और जनता का विश्वास भी प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले लगभग एक महीने से राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान पर मुख्यमंत्री का मौन अत्यंत चिंताजनक है। मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में प्रशासन सरकार के निर्देशों से चलेगा या अधिकारियों की मनमानी से। उनकी चुप्पी प्रशासनिक अराजकता को अप्रत्यक्ष संरक्षण देने का काम कर रही है, जो राज्यहित में बिल्कुल भी उचित नहीं है।

उन्होंने राज्य सरकार से प्रशासनिक अनुशासन बहाल करने, अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया विभाग के सह-संयोजक अजय राय और नीरज सिंह भी उपस्थित रहे।

Share This Article