रांची : बुढ़मू अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) सच्चिदानंद कुमार वर्मा के भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के तौर-तरीकों का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के नाम पर घूसखोरी के मामले में जेल में बंद पूर्व सीओ के खिलाफ एसीबी को कई पुख्ता सबूत मिले हैं। जांच में सामने आया है कि अंचल कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर घूसखोरी का एक संगठित ढांचा तैयार किया गया था, जहां महज 24 घंटे के भीतर खारिज आवेदनों को पैसे मिलते ही मंजूरी दे दी जाती थी।

एसीबी को मिले 17 संदिग्ध मामले
एसीबी की तफ्तीश के दौरान ऐसे 17 संदिग्ध मामलों के दस्तावेज मिले हैं, जिनमें पूर्व सीओ ने पहले आम रैयतों के म्यूटेशन आवेदनों में जानबूझकर तकनीकी खामियां निकालकर उन्हें निरस्त कर दिया था। इसके बाद जब परेशान आवेदक बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए सीओ तक पहुंचते थे, तो पैसे का सौदा तय होते ही खारिज आवेदन को मंजूरी की हरी झंडी दे दी जाती थी।
भेष बदलकर अधिकारियों ने की रेकी
इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए एसीबी के अधिकारियों ने खुद भेष बदलकर अंचल दफ्तर की रेकी की थी। मामला तब शुरू हुआ जब शिकायतकर्ता सुबोध कुमार जमीन के म्यूटेशन के लिए पूर्व सीओ से मिले और उन्होंने उसे सीधे राजस्व उप-निरीक्षक राजेश किशोर रवि के पास भेज दिया। रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर जाल बिछाकर राजेश के भाई गौतम कुमार को 10 हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।
जांच में यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई है कि रिश्वत की रकम केवल नकद में ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों (यूपीआई) से भी वसूली जाती थी। बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों से स्पष्ट हुआ है कि घूस की राशि यूपीआई के जरिए राजस्व उप-निरीक्षक के परिजनों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी।


